जिला प्रशासन के प्रति फूटा छात्रों का आक्रोश
नवादा कार्यालय : जिला प्रशासन द्वारा अांबेडकर छात्रावास के पूर्वी हिस्से में बनाये जानेवाले वेंडर जोन पर ग्रहण लगने के आसार दिख रहे हैं. जिला प्रशासन द्वारा स्थल मुआयना कर एक निश्चित स्थल पर वेंडर जोन बनाने की कवायद की जानी थी. इसके लिए छात्रावास के पूर्वी हिस्से की एक एकड़ की जमीन का चयन किया गया था. परंतु छात्रावास के विद्यार्थियों द्वारा इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए विरोध किया जा रहा है.
छात्रावास के पूर्वी हिस्से में विद्यार्थियों के लिए खेल मैदान की व्यवस्था 2011-12 में तत्कालीन जिला पदाधिकारी दिवेश सेहरा द्वारा की गयी थी. इस जमीन पर चहारदीवारी बनाने के लिए टेंडर भी निकाला गया था. भवन निर्माण विभाग द्वारा यह कार्य भी शुरू हुआ था. लेकिन कार्य को बीच में अधूरा ही छोड़ दिया गया था. इधर, जिलाधिकारी मनोज कुमार द्वारा स्थल निरीक्षण के बाद इसे वेंडर जोन में तब्दील करने का निर्देश दिया गया है.
इससे हॉस्टल के छात्रों में जबरदस्त आक्रोश है. छात्रों ने अपने खेल मैदान की जमीन पर किसी तरह के निर्माण पर चरणबद्ध आंदोलन करने का एलान किया है.
प्रमुख लोगों ने विद्यार्थियों को दिया है प्रेरणात्मक बढ़ावा : हॉस्टल के विद्यार्थियों को जीवन संवारने व बेहतर नागरिक बन कर देश के विकास में योगदान देने के लिए भी प्रेरित किया जाता है. कई प्रमुख हस्तियों ने यहां आकर छात्रों का मनोबल बढ़ाया है. मगध क्षेत्र के कमिश्नर केपी रमैया, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, पूर्व सांसद संजय पासवान, अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन विद्यानंद विकल, महादलित आयोग से सुरेंद्र रजवार, रामचंद्र प्रसाद जैसे व्यक्तियों ने हॉस्टल पहुंच कर छात्रों को अपने कैरियर में बेहतर करने के गुर बताये हैं. हॉस्टल के कई छात्र आज विभिन्न विभागों में केंद्र व राज्य सरकार को सेवाएं दे रहे हैं.
वेंडर जोन के लिए जमीन आवंटन पर बढ़ा आक्रोश : विगत सप्ताह खेल मैदान की खाली पड़ी जमीन पर वेंडर जोन बनाये जाने की घोषणा के बाद छात्रों में जबरदस्त आक्रोश हैं. छात्र अपने भविष्य से किसी प्रकार के खिलवाड़ से समझौता नहीं करना चाहते हैं. जिले के 14 प्रखंडों से अनुसूचित जाति के बच्चे आकर हॉस्टल में रहते हैं. मुख्यालय के विभिन्न स्कूल कॉलेजों में उच्च शिक्षा पाते हैं. नौकरियों की तैयारी भी करते हैं. हॉस्टल में विवाद होने से छात्रों के पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.
छात्रावास का है काफी पुराना अतीत
शहर के बीच से गुजरी खुरी नदी के उत्तरी किनारे पर बना अांबेडकर अनुसूचित जाति कल्याण छात्रावास का इतिहास ढाई दशक पुराना है. बिहार राज्य के कल्याण मंत्री महावीर पासवान ने तीन जून 1988 को छात्रावास को अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के हित के लिए समर्पित किया था. उस समय एक सौ छात्रों को आवासीय सुविधा मुहैया करा कर उच्च शिक्षा पाने के लिए प्रेरित करने के लिए हॉस्टल बनाया गया था. अब तक हजारों छात्रों ने हॉस्टल में रह कर पढ़ाई की है और अच्छी नौकरियों पायी हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
छात्रावास में विद्यार्थियों के शैक्षणिक व सर्वांगीण विकास की दिशा में बेहतर प्रयास किया जाना है. इसके लिए छात्रों से रू-ब-रू होकर उनके सुनहरे भविष्य को गढ़ने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है. राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार होकर बच्चों का भविष्य बरबाद नहीं हो. इसके लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास करेगी. पदाधिकारी निश्चित अंतराल पर छात्रों से मिल कर उनकी समस्या को दूर करेंगे. हॉस्टल के छात्रों के भविष्य को लेकर पदाधिकारी बेहतर पहल करेंगे. विद्यार्थी अपनी पढ़ाई करके बेहतर भविष्य बनाने के लिए कड़ी मेहनत करें.
राजेश कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर अनुमंडल, नवादा
आंबेडकर हॉस्टल में रह कर सफल होनेवाले छात्र
बाल मुकुंद रविदास : नाजीर, अनुमंडल पदाधिकारी, नवादा
योगेंद्र रविदास : सब इंस्पेक्टर
भरत पासवान : यूडीसी, सिकंदराबाद
संजय पासवान : सचिवालय सहायक
नीलम चौधरी : सचिवालय सहायक
सरोज रजक : सचिवालय सहायक
संजय चौधरी : जूनियर इंजीनियर, रेलवे
शंभु पासवान : बीएमपी
भोली चौधरी : लोकोमोटिव पायलट, रेलवे
मनोज चौधरी : लोकोमोटिव पायलट, रेलवे
