सिविल कोर्ट में ट्वॉयलेट लगना ''अपराध''

नवादा (कोर्ट) : जी हां चौंकिए नहीं. मान लीजिए आपके वाद की सुनवाई सिविल कोर्ट के तृत्तीय तल्ले के किसी कोर्ट में होती है और आपको ट्वॉयलेट की जरूरत पड़ जाये, तो आपको इसके लिए नीचे उतर कर परिसर के उत्तर-पूरब कोने में जाना पड़ेगा. जब टायलेट से निबटकर आप अपने कोर्ट में पहुचेंगे तब […]

नवादा (कोर्ट) : जी हां चौंकिए नहीं. मान लीजिए आपके वाद की सुनवाई सिविल कोर्ट के तृत्तीय तल्ले के किसी कोर्ट में होती है और आपको ट्वॉयलेट की जरूरत पड़ जाये, तो आपको इसके लिए नीचे उतर कर परिसर के उत्तर-पूरब कोने में जाना पड़ेगा. जब टायलेट से निबटकर आप अपने कोर्ट में पहुचेंगे तब तक आपके वाद की सुनवाई हो चुकी होगी और आपका बेल बांड विखंडित हो चुका होगा. इस बात की संभावना और डर हमेशा मुव्वकिलों के साथ-साथ वकीलों को भी बनी रहती है. आप पूछेंगे कि सिविल कोर्ट नवादा की बिल्डिंग इतनी अच्छी बनी हुई है, तो क्या इसमें ट्वॉयलेट की व्यवस्था नहीं की गयी है.
इसके लिए आप पड़ताल करेंगे तो पायेंगे की सभी तल्लों पर उत्तर पूरब कोने में एक-एक कमरा ऐसा बना हुआ है, जिन पर लोहे का मजबूत फाटक लगा हुआ है. उस पर लिंक का अटूट ताला. पुन: आपके चौकने की बारी है. आप सोच रहे हैं कि ये कमरे सिविल कोर्ट भंडार गृह है. परंतु ऐसा नहीं है. ये सभी कमरे टायलेट हैं. इसका उपयोग तो दूर, दीदार करना भी मुव्वकिलों व वकीलों के नसीब में नहीं है. किसी पूर्व जन्म की कमाई के परिणाम स्वरूप यदि दर्शन हो जाये तो आप पायेंगे की अंदर टाइल्स लगा हुआ चमचमाता ट्वॉयलेट है.
परंतु अंदर से आने वाली दुर्गंध इस बात का अहसास आपको जरूर करा देगी की नियमित सफाई की व्यवस्था नहीं है. तृतीय तल्ले पर ट्वॉयलेट के बगल में एपीओ साहब का चैंबर है, परंतु वहां भी टायलेट की चाभी नहीं होती है.
नाम नहीं बताने की शर्त पर एक बुजुर्ग एपीओ साहब ने बताया की ट्वॉयलेट लग जाने के बाद कभी-कभी चाभी खोजने के चक्कर में इतना विलंब हो जाता है कि भगवान न करे ऐसी स्थिति किसी और की हो. द्वितीय तल्ले के ट्वॉयलेट की चाभी पर एक महिला पेशकार के अलावा दो महिला वकीलों का कब्जा होता है, जो किसी तरह महिला सम्मान बचाने में सफल होती है. ट्वॉयलेट की ऐसी अद्वितीय व्यवस्था संभवत: अन्य किसी सिविल कोर्ट में भी नहीं है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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