विभागीय खींचातानी में लौट गये 2. 31 करोड़ रुपये पैसे लौटने के कारण नहीं हो सका बस पड़ाव का जीर्णोद्धारफोटो-नवादा/8कैप्शन- बुधौल बस पड़ावप्रतिनिधि4नवादा (सदर)वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद कई विभागों में राशि खर्च नहीं होने पर उसे लौटा दिये जाने का मामला धीरे-धीरे प्रकाश में आ रहा है. नगर पर्षद व जिला पर्षद की आपसी खींचतान के कारण बुधौल बस पड़ाव एक बार फिर से विकास होने से वंचित रह गया. इसके विकास के लिए लाये प्रथम किस्त दो करोड़ 31 लाख रुपये 31 मार्च 2016 को वापस कर दिया गया. नगर विकास विभाग की ओर से शहर में सभी संसाधनों से सुसज्जित बस पड़ाव का निर्माण किये जाने को लेकर चार करोड़ 62 लाख रुपये आवंटित किये गये थे. नगर पर्षद के पास बस पड़ाव का निर्माण कराने को लेकर कहीं भी अपनी जमीन नहीं थी. जमीन के अभाव में नगर पर्षद ने जिला पर्षद को बुधौल बस पड़ाव का सौंदर्यीकरण कराने की बात कही थी. परंतु नगर पर्षद द्वारा जिला पर्षद के समक्ष बुधौल बस पड़ाव से प्राप्त लाभ का कुछ अंश नगर पर्षद को दिये जाने का शर्त रखा गया था. परंतु जिला पर्षद ने बस पड़ाव के सौंदर्यीकरण के लिए प्राप्त दो करोड़ 31 लाख रुपये बगैर किसी शर्त के लेने की बात कही. परंतु नगर पर्षद अपनी जिद पर अड़ा रहा. जिला पर्षद भी बिहार सरकार के नगर विकास विभाग द्वारा प्राप्त अनुदान की राशि बिना किसी शर्त के बस पड़ाव के सौंदर्यीकरण के लिए लगाने की बात कही थी. इस बात पर नगर पर्षद राजी नहीं हुआ और 31 मार्च को बस पड़ाव के सौंदर्यीकरण के लिए प्राप्त राशि को वापस कर दिया. क्या कहते हैं अधिकारीनगर विकास विभाग से प्राप्त राशि पर नगर पर्षद का अधिकार होता है. जिला पर्षद द्वारा नगर विकास विभाग से प्राप्त राशि से सौंदर्यीकरण के बाद प्राप्त होने वाले आय में कोई भी लाभ अंश देने से स्पष्ट इनकार कर दिया. इसके कारण नगर पर्षद में उक्त राशि को वापस नगर विकास विभाग भेज दिया. कृष्ण मुरारी, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पर्षद नवादा
विभागीय खींचातानी में लौट गये 2. 31 करोड़ रुपये
विभागीय खींचातानी में लौट गये 2. 31 करोड़ रुपये पैसे लौटने के कारण नहीं हो सका बस पड़ाव का जीर्णोद्धारफोटो-नवादा/8कैप्शन- बुधौल बस पड़ावप्रतिनिधि4नवादा (सदर)वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद कई विभागों में राशि खर्च नहीं होने पर उसे लौटा दिये जाने का मामला धीरे-धीरे प्रकाश में आ रहा है. नगर पर्षद व जिला पर्षद की […]
