सूबे में मंगलवार को पूर्ण शराबबंदी का असर जिले में दिखा जा रहा है. बिहार मंत्रिमंडल के फैसले को महिलाओं ने सराहा है, तो शराबियों ने इसके लिए सरकार को जम कर कोस रहे हैं. पूर्ण शराबंदी का असर शहर में इतना दिखा कि चार दिन बाद अंगरेजी शराब की चार दुकानों की शराब आयी, लेकिन सरकार के फैसले के बाद खुली नहीं.
नवादा (सदर) : मंगलवार को बिहार मंत्रिमंडल द्वारा प्रस्ताव पारित कर पूर्ण शराब बंदी को लागू किये जाने का नवादा जिले में व्यापक असर देखा जा रहा है. पूर्व घोषणा के अनुसार नवादा जिला मुख्यालय में 12 विदेशी शराब की दुकानें खोली जानी थी.
उत्पाद विभाग ने इसको लेकर स्थल चयन के साथ-साथ दुकान खोलने की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली थी. परंतु मंगलवार से पूर्ण शराब बंदी लागू होने के बाद अंगरेजी शराब की दुकानें भी अब नहीं खुल पायेगी. एक अप्रैल से पूरे बिहार में देसी शराब व ताड़ी पर प्रतिबंध लगा दिये जाने के बाद शराब के शौकीन अंगरेजी शराब की दुकानें खुलने का इंतजार बेसब्री से कर रहे थे. परंतु नीतीश सरकार के इस फैसले के बाद शराब प्रेमियों के दिलों पर कुठाराघात पहुंचा है. नीतीश सरकार के इस फैसले को प्रदेश की जनता ने जहां सराहना की है, वहीं शराब के शौकीन लोग इसे नीतीश सरकार का गलत निर्णय करार दिया है.
उत्पाद विभाग ने कर रखी थी पूरी तैयारी : देसी शराब व ताड़ी पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किये जाने के बाद महज कुछ दिनों के लिए खुलने वाली अंगरेजी शराब की दुकानों को लेकर उत्पाद विभाग तैयारी पूरी कर रखी थी.
एक अप्रैल को बैंक बंदी के बाद विभाग ने जिला मुख्यालय में सभी 12 दुकानों को खोलने के लिए परमिट व लाइसेंस जारी कर रखे थे. साथ ही साथ बीवरेज से अंगरेजी शराब नहीं आने के कारण तीन व चार अप्रैल को दुकानें नहीं खुल पायी.
पांच अप्रैल को बीवरेज से शराब आने के बाद दुकान खोलने की तैयारी धरी की धरी रह गयी. फिर से सरकारी फरमान पूर्ण शराब बंदी के लिए जारी हो गया. ऐसे में विभाग की ओर से चार दुकानों के शटर को नहीं उठाया. इस व्यवस्था से जहां विभाग को परेशानी हुई. वहीं शराब के शौकीन लोगों के दिलों पर भी कुठाराघात हुआ है.
सरकार से पुनर्विचार करने की मांग
मंगलवार को मुख्यमंत्री व कैबिनेट की ओर से लिये गये बिहार में पूर्ण शराब बंदी के फैसले के बाद लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. अधिकतर महिलाओं ने नीतीश सरकार की इस फैसले की सराहना की है, तो शराब पसंद लोगों ने कहा है कि नीतीश सरकार द्वारा जल्दबाजी में निर्णय लिया गया है.
सरकार को इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है. दूसरी तरफ, महादलित परिवार से जुड़े रोजी रोजगार के धंधे ताड़ी बिक्री पर भी रोक लगा दिये जाने से इससे जुड़े लोगों ने नाराजगी जाहिर की है. ऐसे लोगों का कहना है कि सरकार को पहले हम लोगों के लिए रोजगार का वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए. उसके बाद ही इस तरह के निर्णय लिये जाने चाहिए.
बिहार में पूर्ण शराब बंदी मंगलवार से लागू होने के बाद खोली गयी अंगरेजी शराब की चार दुकानों को भी बंद कर दिया गया है. जिले भर में देसी, विदेशी शराब व ताड़ी के बिक्री व उपभोग करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का निर्णय लिया गया है.
प्रेम प्रकाश, उत्पाद अधीक्षक, नवादा
