श्वेतक्रांति से खुशहाल हो रहे किसान

प्रयास. दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गांव-गांव में गठित हो रहीं समितियां खेती के साथ दुग्ध उत्पादन में भी जिले के किसान अब आगे आ रहे हैं. सहकारिता के माध्यम से समिति बना कर किसान अपने उत्पादित दूध को डेयरी तक पहुंचा कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. जिले में 10 हजार लीटर […]

प्रयास. दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गांव-गांव में गठित हो रहीं समितियां
खेती के साथ दुग्ध उत्पादन में भी जिले के किसान अब आगे आ रहे हैं. सहकारिता के माध्यम से समिति बना कर किसान अपने उत्पादित दूध को डेयरी तक पहुंचा कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. जिले में 10 हजार लीटर दूध संग्रहण की क्षमतावाला प्लांट लगा हुआ है. फिलहाल 50 से अधिक समितियों के माध्यम से चार हजार से अधिक लीटर दूध संग्रह किया जा रहाहै. दुग्ध उत्पादकों को गाय उपलब्ध कराने के साथ ही उसके लिए चारे व इलाज में भी सहकारिता से मदद मिल रही है.
नवादा (नगर) : खेती के साथ ही किसान दूध का उत्पादन कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. जिले के कई प्रखंडों में सहकारिता के माध्यम से समिति बना कर दुग्ध का संग्रह ग्रामीण स्तर पर किया जाता है, जिसे समिति की गाड़ियों द्वारा नवादा स्थित दुग्ध शीतक केंद्र में पहुंचाया जाता है. दूध में मौजूद वसा की मात्रा के अनुसार किसानों को इसके रुपये भुगतान किये जाते हैं.
समिति द्वारा जमा किये गये दूध को सुधा डेयरी के मगध प्लांट गया में सप्लाइ की जाती है. जिले में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जिला दुग्ध शीतक केंद्र के माध्यम से गांव-गांव जाकर समितियों का गठन किया जा रहा है. दूध उत्पादकों को उनके दूध का सही कीमत मिले इसके लिए दूध में वसा व फैट की मात्रा की जांच समिति स्तर पर व दुग्ध शीतक केंद्र में भी की जाती है. किसानों को उनके उत्पादन के अनुसार रुपये हर10 दिन के बाद उपलब्ध करा दिया जाता है. श्वेतक्रांति से किसान आर्थिक रूप से संपन्न हो रहे हैं
जिले में दूध उत्पादन की मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता है. जिला शीतक केंद्र में 10 हजार लीटर दूध संग्रह करने की क्षमता है. लेकिन, फिलहाल 50 से अधिक समितियों के माध्यम से चार हजार से अधिक लीटर दूध संग्रह किया जाता है.
समिति का गठन ग्रामीण स्तर पर कम से कम 20 दूध उत्पादकों के समूह से शुरू किया जाता है, जो अपने-अपने दूध को एक जगह इकट्ठा कर गाड़ियों के माध्यम से जिला स्तर तक पहुंचाते हैं. यहां दूध की गुणवत्ता की जांच कर इसे सुधा डेयरी के मगध क्षेत्र कार्यालय गया में सप्लाइ की गयी है. दूध उत्पादन बढाने को लेकर जिला स्तर से प्रयास किये जा रहे है.
स्वास्थ्य शिविर का होता है आयोजन : सहकारिता के माध्यम से चलनेवाले डेयरी फॉर्म से जुड़े दूध उत्पादकों को पशुओं के इलाज के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी लगाया जाता है.
पिछले दिनों अकबरपुर प्रखंड के बुधवारा सहकारिता समिति में किसानों को पशुओं की देखरेख करने व शुद्ध दूध का संग्रहण करने की जानकारी देने को लेकर शिविर का आयोजन किया गया. मगध डेयरी क्षेत्र के पशु चिकित्सक डाॅ प्रभात रंजन द्वारा पशुओं के स्वास्थ्य की जांच की गयी तथा स्वच्छ दूध उत्पादन के बारे में जानकारी दी गयी. एक माह में दो से तीन बार अलग-अलग समितियों में यह कैंप लगाया जाता है.
जांच के बाद मिलते हैं रुपये : दूध में वसा व घी की मात्रा का पता लगाने के लिए लैक्टोमीटर या इलेक्ट्रोनिक मिलको टेस्टर का उपयोग किया जाता है. जिले की 10 समितियों को इलेक्ट्रॉनिक मिलको टेस्टर उपलब्ध कराया गया है. दूध की शुद्धता समिति में तथा उसके बाद दूध शीतक केंद्र में जांच की जाती है.
10 मिली लीटर दूध में एक मिली लीटर एमाइल एल्कोहल व 10.75 मिली लीटर दूध में एक मिली लीटर सल्फयूरिक एसिड डाल कर दूध में मौजूद घी व छेना का पता करके किसानों को नियम अनुसार रुपये का भुगतान किया जाता है. किसानों के बिल के अनुसार 10 दिनों में एक बार दूध का हिसाब समिति के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है. सामान्य मार्केट से अधिक लाभ किसानों को सहकारिता के माध्यम से प्राप्त हो रहा है.
गाय वितरण में गड़बड़ी का आरोप : जिला गव्य विकास विभाग द्वारा सब्सिडी के आधार पर वितरण किये गये पशुओं में सहकारिता समितियों की अनदेखी का आरोप किसानों ने लगाया है.
समिति से जुड़े किसानों ने कहा कि सरकार द्वारा दिये गये अनुदान को शुभ लाभ के चक्कर में दूसरे किसानों को दे दिया गया. जबकि समिति से जुड़े किसानों को यदि यह जानवर उपलब्ध कराया जाता तो निश्चित ही और बेहतर स्थिति होती. सगमा सहकारिता समिति के विपीन कुमार, जुली देवी, गड़ही समिति के रिंकू कुमार, विमल देवी आदि ने कहा कि जिला गव्य विकास के माध्यम से सहकारिता किसानों को भी गाय उपलब्ध कराया जाये.
रियायत दर पर मिलता है चारा भी
डेयरी से जुड़े किसानों को रियायत दर पर चारा भी उपलब्ध कराया जाता है. हरा चारा के लिए सरगम सुडान व कॉपि बीज घास का बीज किसानों को सस्ते दर में उपलब्ध कराया गया.
गरमी के दिनों में दूध की मात्रा बरकरार रहे इसके लिए हरे घास को चारे के रूप में इस्तेमाल कराया जाता है. समितियों के लिए जिले द्वारा पांच सौ किलो ग्राम सरगम सुडान का बीज व तीन सौ किलो ग्राम कॉपि घास का बीज अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया गया है. इसके पहले नवंबर में बरसीम व जई घास का बीज अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया गया था.
प्रत्येक माह पांच समूह बनाने का लक्ष्य
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों द्वारा दूध का अधिक से अधिक उत्पादन हो इसके लिए प्रत्येक माह पांच समूहों का गठन करने का लक्ष्य रखा गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में समिति बनाने के लिए क्षेत्र का सर्वेक्षण करके लोगों से बातचीत कर डेयरी फॉर्म के फायदों के बारे में बतलाया जाता है.
खेती के साथ दूध उत्पादन करने से किसानों को कैसे अधिक से अधिक लाभ मिलेगा. इसके बारे में शीतक केंद्र द्वारा जानकारी दी जाती है. दूध उत्पादकों को डेयरी के माध्यम से दूध बेचने से न केवल दूध की सही कीमत मिलती है, बल्कि पशुओं में होनेवाले रोगों के बारे में जानकारी, इलाज की सुविधा, पशुचारा को रियायत दर में उपलब्ध कराने आदि की सुविधा भी दूध उत्पादकों को उपलब्ध करायी जाती है.

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