नवादा (नगर). होली का त्योहार प्यार व सौहार्द का त्योहार है. होली में एक दूसरे को रंग व गुलाल लगा कर जीवन में रंगीनियां लाने की शुभकामना देते हैं. पहले कृत्रिम फूलों व मसालों से रंग तैयार किये जाते थे. जिनका शरीर व चेहरे पर अच्छा प्रभाव पड़ता था. लेकिन, रासायनिक अबीर व गुलाल से चेहरों को नुकसान पहुंचता है.
रंगों से चेहरे के अलावा बाल, आंख व होंठ आदि पर भी असर पता है. केमिकल युक्त रंग व अन्य रासायनिक पदार्थों से बचाव के लिए ध्यान देने की जरूरत है. त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए होली खेलने से पहले हाथों और चेहरे के खुले हिस्से में सन स्क्रीन क्रीम या तेल लगाना चाहिए.
10 मिनट तक सूखने के बाद ही होली का रंग खेलें. ताकि इसका कोई गलत असर शरीर पर न पड़े. संभव हो तो फुल बांह के कपड़े पहने इससे धूप व रंग दोनों से शरीर का बचाव होगा. चटक गहरे रंग के रंगों के बजाय गुलाल से होली खेलना ज्यादा बेहतर होता है.
आंखों में रंग चले जाने के बाद पानी से तुरंत आंखों को धोयें, बावजूद आंखों में जलन समाप्त नहीं हो तो निश्चित ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. रंगों को छुड़ाने के लिए साबुन के बजाय बेसन दूध से रंग छुड़ाने का प्रयास करें. इससे चेहरे पर रेसेज नहीं आते हैं.
