ठंड से दुधारू पशुओं को बचायें

ठंड से दुधारू पशुओं को बचायें कोल्ड डायरिया व निमोनिया का बढ़ता है खतरा मुर्गियों की पोक्सी डीओसिस से होती है मौतपशुपालन विभाग के पास उपलब्ध है महत्वपूर्ण दवाएंजिला पशुपालन केंद्र में औसतन 25 से 30 पशुओं का रोज होता है इलाजफोटो-3प्रतिनिधि, नवादा (नगर)तापमान का पारा गिरने के साथ ही ठंड के कारण जानवरों में […]

ठंड से दुधारू पशुओं को बचायें कोल्ड डायरिया व निमोनिया का बढ़ता है खतरा मुर्गियों की पोक्सी डीओसिस से होती है मौतपशुपालन विभाग के पास उपलब्ध है महत्वपूर्ण दवाएंजिला पशुपालन केंद्र में औसतन 25 से 30 पशुओं का रोज होता है इलाजफोटो-3प्रतिनिधि, नवादा (नगर)तापमान का पारा गिरने के साथ ही ठंड के कारण जानवरों में कई प्रकार के बीमारियां बढ़ रही है. ठंड के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही के कारण पशुओं को अनेक प्रकार के ठंड की बीमारी हो जाती है. खास कर दिसंबर व जनवरी महीने में दुधारू पशुओं की देख-रेख में विशेष ध्यान देने की जरूरत है. जानवरों को शीत के प्रभाव से बचाने के लिए बंद स्थानों में रखने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि सर्द हवाओं का सीधा संपर्क जानवर से नहीं हो. नमी वाले स्थानों पर रात में जानवरों को बांधने से बचना चाहिए. जानवरों को ठंड के प्रभाव से बचाने के लिए जूट का बोरा पहना कर रखें व सुबह-शाम आग जलाने की व्यवस्था करनी चाहिए. जानवरों को सही तरीके से धूप लगे, इसकी चिंता पशुपालकों को करनी चाहिए. कोल्ड डायरिया का बढ़ा खतराकनकनी व सर्द हवाओं के कारण जानवरों में कोल्ड डायरिया का खतरा बढ़ा है. ठंड लगने के कारण जानवरों को कोल्ड डायरिया होता है. इसमें पतले गोबर करने के साथ ही शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इस समय जानवर को आग जलाकर गर्म करने की प्रयास करना चाहिए व एंटी डायरिया व एस्टीजेंट पाउडर जैसी दवाएं जानवरों को दी जाती है. पशु चिकित्सकों के अनुसार, इस मौसम में कोल्ड डायरिया, निमोनिया, बुखार, इनोरेक्सिया के अलावा अन्य बैक्ट्रिया जनित बीमारियां होती है. पशु चिकित्सा केंद्रों में इन रोगों से बचने के लिए दवाएं उपलब्ध है. जिले के सभी पशु चिकित्सा केंद्रों पर डॉक्टर व दवा उपलब्ध होने का दावा विभाग द्वारा किया जाता है. डॉक्टरों से अवश्य लें सलाहठंड के मौसम में कोल्ड डायरिया, निमोनिया, बुखार, इनोरेक्सिया जैसे बीमारियां जो जाती है. इससे बचाव के लिए दवा उपलब्ध है. कोल्ड डायरिया के समय एंटी डायरिया या एस्टीजेंट पाउडर, बुखार में एंटीवायोटिक व एंटीपायरेटिक, बी कंप्लेक्स की दवा दी जाती है. इनोरेक्सिया यानी भूख नहीं लगने की शिकायत पर एपेटाइजर स्टोमेकिक पाउडर जानवरों को दिया जाता है. वर्म से बचाव के लिए डीवार्मर दवा दी जानी चाहिए. जानवर यदि सही से खान-पान या एक्टिवीटी नहीं कर रहा हो तो पशु डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. डॉक्टरों का मिलना भी मुश्किल जिला पशु चिकित्सा केंद्र में डॉक्टरों का अभाव है. जिला मुख्यालय सहित 36 स्थानों पर पशु चिकित्सा केंद्र संचालित है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण एक ही डॉक्टर के पास दो से तीन पशु चिकित्सा केंद्रों का प्रभार मिला है. वर्तमान में 22 स्थायी व पांच कॉन्ट्रेक्ट के डॉक्टर कार्यरत हैं. इनका कार्यकाल भी फरवरी, 2016 में समाप्त हो रहा है. कम डॉक्टरों के कारण पशुओं के इलाज में परेशानी होती है. डॉक्टर की कमी के कारण कई बार कुछ पशु अस्पताल बंद ही रहते हैं. दवाओं की उपलब्धता के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में ग्रामीण स्तर पर संचालित पशुचिकित्सा केंद्रों में बेहतर इलाज भी नहीं हो पाता है. मुरगी पालकों को भी हो रही परेशानीठंड के मौसम में मुरगी पालन के व्यवसाय पर भी प्रभाव पड़ता है. ठंड के कारण मुरगियों के मरने की शिकायत काफी आती है. इस मौसम में इनका ग्रोथ भी घटता है. इस मौसम में यदि मुरगियों को सही से गर्म नहीं रखा गया, तो पोक्सी डियोसिस यानी लाल पैखाना की बीमारी का खतरा बढ़ता है. जिला कुक्कुट पदाधिकारी के अनुसार, इस मौसम में बैक्ट्रियल डायरिया का खतरा भी बढ़ता है. मुरगियों को सीधे हवा के संपर्क में आने से बचाना चाहिए. यदि मुरगी फार्म में कहीं से हवा जाने का स्थान हो तो उसे किसी प्रकार से रोकना चाहिए. मुरगियों को सुबह में धूप लगे इसकी व्यवस्था भी होनी चाहिए. बाड़े में बल्व लगाकर भी मुरगी को गरम रखा जा सकता है. बेहतर करने की कोशिश ठंड के मौसम में जानवरों को बचाने का उपाय करना चाहिए. पशुओं को गर्म रखने की व्यवस्था पशुपालकों को करनी चाहिए. अस्पताल में दवा उपलब्ध है. जो बीमार जानवर अस्पताल में आते है उसका इलाज किया जाता है. जिला में डॉक्टरों की कमी है. बावजूद बेहतर करने की कोशिश रहती है. डॉ श्याम सुंदर प्रसाद, जिला पशुपालन पदाधिकारीकॉल आने पर पहुंच कर होता है इलाज मुरगियों को इस मौसम में विशेष देखभाल की जरूरत होती है. ठंड के कारण मुरगी के चुजों की हिफाजत में कठिनाई होती है. कॉल आने पर मुरगी फार्म में जाकर इलाज करते हैं. दवा व सुझाव मुरगी पालकों को दिया जाता है. डॉ संजय कुमार, जिला कुक्कुट पदाधिकारी

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