व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ता है श्रीमद्भागवत नरहट. श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन का उद्देश्य लोगों का ध्यान भगवान के चरणों में लगाना है. हे प्रभु मेरा मन रूपी भौरा आप के चरणों से लगा रहे़ क्योंकि, अंत समय जब आयेगा, तब कफ पीत वायु से विकट हो जायेगा़ तब आप का स्मरण कैसे करूंगा. उक्त बातें श्री वैष्णव सिद्धपीठ ठाकुरबाड़ी में बुधवार की शाम श्री स्वामी धरनीधराचार्य महराज के जयंती के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सह राम जानकी विवाह महोत्सव के अवसर पर अंतिम दिन प्रवचन के दौरान स्वामी रंगनाचार्य जी महराज ने कही़ं स्वामी जी ने कहा कि यह अवसर तभी तक है जब तक सह शरीर स्वस्थ्य है़ शरीर स्वस्थ्य है, तभी हम चल सकते हैं, देख सकते हैं, बोल सकते हैं. यह अवसर अनमोल है़ इसको गवावों मत़ स्वामी जी ने कहा की भागवत का अर्थ है लोगों को भगवान के चरणों से जोड़ देना़ जयंती के अवसर पर सैकड़ों की संख्या में संत महात्माओं ने भाग लिया़ दिन में गाजे-बाजे के साथ भगवान श्रीरामजानकी झांकी निकाली गयी. झांकी को पूरे नरहट में भ्रमण कराया गया़ झांकी में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया़ रात में श्रीराम जानकी विवाह महोत्सव हुआ़ स्वामी जी ने राम-सीता का प्रसंग को भी लोगों को सुनाया़ स्वामी जी ने कहा की भगवान भक्तों को हर चाह को पूरी करते हैं. किन्तु आवश्यकता यह है कि हम भगवान का हो जायें. भंडारे का प्रसाद वितरण के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का बुधवार को समापन हो गया़
व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ता है श्रीमद्भागवत
व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ता है श्रीमद्भागवत नरहट. श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन का उद्देश्य लोगों का ध्यान भगवान के चरणों में लगाना है. हे प्रभु मेरा मन रूपी भौरा आप के चरणों से लगा रहे़ क्योंकि, अंत समय जब आयेगा, तब कफ पीत वायु से विकट हो जायेगा़ तब आप का स्मरण कैसे करूंगा. उक्त […]
