वासना ही पुर्नजन्म का कारण : स्वामी रंगनाथाचार्यनरहट. वासना ही पुर्नजन्म का कारण है़ अत: वासना को उपासना रूपी अग्नी में भून देना चाहिए़ इससे उसका अंकूर ही समाप्त हो जाये. उक्त बातें रविवार की शाम श्रीवैष्णव पीठ ठाकुरबाड़ी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में चौथे दिन प्रवचन के दौरान स्वामी रंगनाथाचार्य जी महाराज ने कही़ं स्वामी जी ने कहा की इस संसार में जितने भी रोग है़ वह सब समान रोग है़ सबसे भयंकर रोग का नाम भवरोग है़ भवरोग का मतलब बार-बार जन्म लेना मरना, चिता सजाया जाना व जलाया जाना़ उसी का नाम भव रोग हैं. यह यब तभी होगा जब जन्म होगा़ हमारे ऋषियों ने जन्म को भी दुखदायी बतलाया है़ जरा अवस्था भी दुखदायी अवस्था है़ सबसे भंयकर कष्ट होता है़ मरण के समय इसलिए तस्मात् जागृही तस्मात् जागृहि अर्थात जागो जागो अर्थात जागने का मतलब है. संसार के पदार्थों से विरक्ति इस जन्म मरण के भयंकर रोग से मुक्ति का एक ही उपाय है. भगवत भक्ति व भक्ति करने का अधिकारी प्रत्येक प्राणी है़ हमारा सनातन धर्म में प्रत्येक प्राणी के कल्याण का चिंतन किया गया है़ भगवान के उपासना में न जातीय व्यवस्था है न व्यक्तिगत व्यवस्था. जात पात पुछय न कोई, हरि को भजय सो हरि के होई़ भगवान को केवल दो चीजें प्रिय हैं. भक्त और भक्ति पारसमणि के समान है़ इसके स्पर्श होते ही लोहा का सामान भी स्वर्ण की तरह चमक जाती है़ भक्तों के साथ जिन-जिन का संबंध जुटता है़ वह भी परम कल्याण का भागी बनते हैं. बाहर से आये स्वामी राधवेंद्र प्रसन्नाचार्य व रामाधार जी महाराज का प्रवचन भी लोगों ने सुना़ इस दौरान सैकड़ों की संख्या में लोगों ने प्रवचन व भजन का श्रवण किया़ बाबा जी ने बताया की 16 दिसंबर को श्री राम जानकी विवाह महोत्सव का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा़
वासना ही पुर्नजन्म का कारण : स्वामी रंगनाथाचार्य
वासना ही पुर्नजन्म का कारण : स्वामी रंगनाथाचार्यनरहट. वासना ही पुर्नजन्म का कारण है़ अत: वासना को उपासना रूपी अग्नी में भून देना चाहिए़ इससे उसका अंकूर ही समाप्त हो जाये. उक्त बातें रविवार की शाम श्रीवैष्णव पीठ ठाकुरबाड़ी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में चौथे दिन प्रवचन के दौरान स्वामी रंगनाथाचार्य जी […]
