मानव जीवन का प्रधान लक्ष्य भगवत प्राप्ति फोटो-1नरहट. मानव जीवन का परम लक्ष्य भगवत प्राप्ति है़ व्यक्ति को सौ काम छोड़ कर भोजन करनी चाहिए़ हजार काम को छोड़ कर स्नान करना चाहिए. लाख काम को छोड़ कर अच्छे कार्यों के लिए दान देनी चाहिए व करोड़ काम को छोड़ कर भगवान का भजन व आराधना करनी चाहिये. उक्त बातें शुक्रवार की शाम श्री वैष्णव सिद्ध पीठ ठाकुरबाड़ी, नरहट में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन प्रवचन में स्वामी रगंनाथाचार्य जी महाराज ने कहीं. उन्होंने कहा कि आत्मा का धर्म है परमात्मा की आराधना व उपासना करना़ स्वामी जी ने बताया कि परमात्मा की आराधना में तीन चीजों की पवित्रता होनी चाहिये. नेह, देह, व गेह़ नेह अर्थात प्रेम, भगवान की उपासना छल कपट रहित किया जाना चाहिए़ छल कपट के साथ किया जाने वाला पूजा पाठ सफल नही होता है़ देह की शुद्ध स्नान इत्यादि से बतलाया गया है़ गेह का मतलब स्थान घर जिस स्थान पर आराधना की जाये वह स्थान भी पवित्र होनी चाहिए़ पवित्र शरीर से शुद्ध अंत:करण द्वारा परमात्मा की आराधना करें. हमारे यहां सनातन धर्म में उपासना की जो परंपरा है, उसमें यम, नियम व संयम के साथ परमात्मा की भक्ति करने को बताया गया है़ बिना यम, नियम व संयम के परमात्मा की आराधना सफल नही होता है़ बिना भगवत कृपा से जीवात्मा का पूर्ण विकास संभव नहीं है़ इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरुषों ने सत्संग में भाग लेकर भजन व प्रवचन का श्रवण किया़
मानव जीवन का प्रधान लक्ष्य भगवत प्राप्ति
मानव जीवन का प्रधान लक्ष्य भगवत प्राप्ति फोटो-1नरहट. मानव जीवन का परम लक्ष्य भगवत प्राप्ति है़ व्यक्ति को सौ काम छोड़ कर भोजन करनी चाहिए़ हजार काम को छोड़ कर स्नान करना चाहिए. लाख काम को छोड़ कर अच्छे कार्यों के लिए दान देनी चाहिए व करोड़ काम को छोड़ कर भगवान का भजन व […]
