सुधर नहीं रहीं आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति रोह. लाख प्रयास के बाद भी प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है. इसके कारण सरकार जिस आकांक्षा के साथ गावों में इन केंद्रों का गठन हुआ था उसकी पूर्ति नहीं हो रही है. आइसीडीएस द्वारा केंद्रों के संचालन व टेक होम राशन के लिए जो रुपये मिलता है उसका भी बंदरबांट हो जाता है. इसके लिए स्थानीय पदाधिकारी पूरी तरह जवाबदेह हैं. 14 पंचायतों वाले इस प्रखंड में केंद्रों के संचालन व टेक होम राशन के लिए जो रुपये मिलते हैं उसका लाभ लाभुकों को 10 प्रतिशत भी नहीं मिलता है. कुपोषित बच्चे, गर्भवती महिलाओं व किशोरी बालिकाओं को यदा-कदा ही राशन मिलता है. अधिकतर महीने में केंद्रों की सेविकाएं ही गटक जाती है. सेविकाओं की बात को अगर सही मानें तो इसमें स्थानीय पदाधिकारी की भी मिली भगत होती है. इतना ही नहीं केंद्रों में पांच वर्ष तक के 40 बच्चों को शिक्षा दिया जाना है. परंतु, 99 प्रतिशत केंद्रों पर भी इतनी संख्या नहीं होती है, जबकि इसके देख-भाल के लिए सुपरवाइजर भी बहाल हैं. वह भी नियमित रूप से केंद्रों का निरीक्षण नहीं करते हैं. इसके कारण ही सेविकाओं द्वारा संचालन में मनमानी की जाती है.
सुधर नहीं रहीं आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति
सुधर नहीं रहीं आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति रोह. लाख प्रयास के बाद भी प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है. इसके कारण सरकार जिस आकांक्षा के साथ गावों में इन केंद्रों का गठन हुआ था उसकी पूर्ति नहीं हो रही है. आइसीडीएस द्वारा केंद्रों के संचालन व टेक होम राशन […]
