नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देकर ही हासिल कर सकते हैं बिहार का गौरव

नवादा : किसी राज्य या देश का गौरव उसके समाज के लोगों के नैतिक मूल्य होते हैं. समाज में घटनेवाली घटनाएं समाज की छवि बनाती और बिगाड़ती हैं. ऐसे में बिहार के गौरव को वापस लाने के लिए लोगों में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना होगा. खो रहे नौतिक मूल्यों की वापसी और सतत प्रगतिशील […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

नवादा : किसी राज्य या देश का गौरव उसके समाज के लोगों के नैतिक मूल्य होते हैं. समाज में घटनेवाली घटनाएं समाज की छवि बनाती और बिगाड़ती हैं. ऐसे में बिहार के गौरव को वापस लाने के लिए लोगों में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना होगा. खो रहे नौतिक मूल्यों की वापसी और सतत प्रगतिशील शिक्षा व्यवस्था को अपना कर हम बिहार के गौरवशाली अतीत को वापस पा सकते हैं. यह बातें शुक्रवार को प्रभात खबर कार्यालय में बिहार दिवस पर आयोजित परिचर्चा में शहर के बुद्धिजीवियों ने कहीं.

उन्होंने कहा कि क्षेत्रवाद की परिधि लांघ कर वैश्विक सोच को अपनाने से ही हमें मुकाम मिल सकता है. लोगों ने कहा कि हमें हम के दायरे से निकला होगा. निर्माण व्यक्ति का और चिंतन समाज का. ऐसी धारणा ही हमें विकास के पथ पर अग्रसर करेगी. लगभग पौने दो घंटे तक चले गहन चिंतन में व्यक्ति से लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति सम्मान
नैतिक मूल्यों को…
दिखा. कई वक्ताओं ने समाज को आईना भी दिखाया, तो कुछ खुद के अक्श टटोलते नजर आये. शहर के जानेमाने शिक्षाविद सेवानिवृत्त प्रो डॉ नरेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में कार्यक्रम की शुरुआत हुई. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है. निरंतर चलनेवाला क्रम है. लेकिन, इसके लिये हमें एक पैमाना तय करना होगा. यह पैमाना अगर दुनिया होगी, तो भारत भी हो सकता है. लेकिन, क्षेत्रीयता कभी नहीं.
इन्होंने केरल के विकास का उदाहरण पेश किया और कहा कि हमें इसका अनुकरण करना चाहिये. साहित्यविद व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक डॉ ओंकार प्रसाद निराला ने कहा कि दुनिया के प्राचीन विश्वविद्यालय हमारे यहां रहे हैं. समृद्धशाली इतिहास रहा है हमारा. परिधियों में न बंधनेवाली संस्कृति रही है हमारी. इसे अपनाना होगा. आधी आबादी का प्रतिनिधित्व कर रही नवादा की एक बेटी, जो इन दिनों पानीपत में प्रोफेसर हैं. राशि सिन्हा ने तेजी से हो रहे वैचारिक, मानसिक और सांस्कृतिक ह्रास पर लोगों का ध्यान खींचा. उन्होंने कहा कि हमें अपनी लोक कला, लोकगीतों, लोकनृत्य और लोकगाथाओं को अपनाना चाहिये. क्षेत्रीय भाषाओं के विस्तार को लेकर अपनी झिझक मिटानी होगी.
समाज के हित में देना होगा योगदान
शिक्षा, समाजसेवा और रंगमंच से जुड़े लोगों ने कहा कि बिहार के गौरव को हासिल करने में युवा शक्ति अहम भूमिका निभा सकती है. कई शैक्षणिक संस्थानों का संचालन कर रहे डॉ अनुज कुमार ने कहा कि युवाओं को संकल्प लेना होगा कि वे समाज और देश के हित में अपना शत-प्रतिशत योगदान देंगे.
समाज के हित में…
इन्होंने कहा कि आज कथनी और करनी में बड़ा अंतर दिख रहा है. यह अंतर हमें अपने उद्देश्यों से भटकाता है. शिक्षाविद डॉ रापाकाश्पेय ने कहा कि आज कामचोर लोगों का एक वर्ग है. यह न तो खुद काम करता है और न दूसरों को करने देता है. राजेंद्र सिंह ने कहा कि बगैर शिक्षा लोगों का कल्याण संभव नहीं है.
प्रभात खबर की ओर से करायी गयी अहम परिचर्चा
‘कैसे हासिल होगा बिहार का गौरव’ विषय सबने रखे विचार
सतत प्रगतिशील व्यवस्था से सुधरेगी छवि
विकास एक सतत प्रक्रिया है, जो काल व परिस्थिति के अनुसार अपना रूप लेती है. विकास का पैमाना वैश्विक परिदृश्य में कितना हुआ है, इसे जानने की जरूरत है.
अपनी कला, साहित्य व सांस्कृतिक को बढ़ावा देना होगा. वर्तमान व भविष्य की बेहतरी के लिए राज्य की गौरवशाली परंपराओं को बचाना होगा. देश को बिहार ने पूर्वी गीत, ध्रुपद राग जैसा खजाना दिया है, लेकिन यहां के लोग इससे अनजान हैं. लोकगीत, लोकभाषा को सहेजने, संवारने की आवश्यकता है. मधुवनी पेंटिंग सहित अन्य कला को बढ़ाने की पहल करनी होगी.
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