एजेंसी के जरिये दी जायेगी सुविधा: सीएस
12 रुपये प्रति किमी देने में सक्षम नहीं लोग
मरीजों की कट रही जेब प्रशासन बेखबर
नवादा : सदर अस्पताल, जिसे जिले का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान माना जाता है. बावजूद यहां करीब तीन साल से शव ढोनेवाले वाहन का इस्तेमाल नहीं किया गया है. ऐसा नहीं है कि इस दौरान किसी मरीज की मौत यहां नहीं हुई है बल्कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही व अनदेखी के कारण यह स्थिति पैदा हुई. इसका परिणाम यह हुआ कि इलाज के दौरान दम तोड़े मरीज के शव को घर तक ले जाने के लिए परिजनों को प्राइवेट गाड़ी की तलाश करनी पड़ती है.
उसके लिए उन्हें अधिक किराया चुकाना पड़ता है़ जानकारी के अनुसार राज्य स्वास्थ्य समिति ने जिला अस्पतालों को उसके मापदंडों के अनुरूप सभी सदर अस्पतालों में शव ढोने के लिए स्पेशल वाहनों की व्यवस्था की है. करीब तीन वर्ष पूर्व नवादा सदर अस्पताल में भी इसी व्यवस्था के तहत शव वाहन उपलब्ध कराया गया था़ टॉल फ्री नंबर 1099 डायल करने पर यह सेवा लोगों को दी जाती है.
इस वाहन का उपयोग सदर अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़नेवाले मरीजों के शव को ढोने के लिए उपलब्ध कराया गया है. इसके पीछे का उद्देश्य यह था कि परिजनों को शव घर तक ले जाने में दिक्कत न हो.जबकि एक और वाहन सड़क दुर्घटनाओं जैसी परिस्थितियों में घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल तक लाने के प्रयोग में आता था़
शुरुआत के कुछ दिनों तक यह सेवा निर्बाध रूप से लोगों को मिली, लेकिन कुछ माह के अंदर ही यह सेवा धाराशायी हो गयी. अब दोेनों वाहन अस्पताल परिसर में खुद मृत शय्या पर खड़ी हो गयी़ हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों से शवों को अस्पताल से घर तक ले जाने को लेकर कई तरह की खबरें विभिन्न समाचार के माध्यमों से प्रमुखता पूर्वक आयी और इसको लेकर अलग-अलग राज्य की सरकारों व अस्पताल प्रबंधन ने पहल कर सुधार के कदम उठाये तथा अस्पतालों से शवों को ले जाने के लिए अनिवार्य रूप से शव वाहन उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया गया़ बावजूद नवादा सदर अस्पताल प्रबंधन को इन बातों से कोई लेना-देना नहीं है़ शव वाहन उपलब्ध होने के बावजूद उसका परिचालन नहीं होना अस्पताल प्रबंधन की अकर्मण्यता को दर्शाता है.
गरीबों को हो रही दिक्कत
अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़नेवाले मरीजों के परिजनों को शव घर तक ले जाने के लिए प्राइवेट वाहनों का सहारा लेने की मजबूरी हो गयी है़ अस्पताल की लापरवाही गरीब व कमजोर तबके के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गयी है़
दूसरी ओर वाहन के रख-रखाव की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं रहने से शव वाहन अस्पताल परिसर में खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है. इससे वाहन कबाड़ के रूप में तब्दील होने लगा है. हाल यह है कि शव ले जाने के लिए परिजनों को बाहर से गाड़ी रिजर्व करने में मुंह मांगा किराया देना पड़ता है. इससे गरीब व लाचार लोगों को आर्थिक क्षति झेलनी पड़ती है.
