बिहारशरीफ : जिले में एक बार फिर से पारा चढ़ने का सिलसिला जारी है. इससे लोगों की हालत पस्त हो गयी है. पूरे दिन चिलचिलाती धूप ने लोगों को बेहाल कर दिया. बढ़ते पारे व चिलचिलाती धूप ने लोगों को बेहाल कर दिया. लोगों की रोजमर्रा की जीवनचर्या प्रभावित हो गयी. सड़कों पर जरूरी काम […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
बिहारशरीफ : जिले में एक बार फिर से पारा चढ़ने का सिलसिला जारी है. इससे लोगों की हालत पस्त हो गयी है. पूरे दिन चिलचिलाती धूप ने लोगों को बेहाल कर दिया. बढ़ते पारे व चिलचिलाती धूप ने लोगों को बेहाल कर दिया. लोगों की रोजमर्रा की जीवनचर्या प्रभावित हो गयी. सड़कों पर जरूरी काम से निकलने वाले लोग ही नजर आये.
पारा के 43 डिग्री तक चढ़ने के कारण लोग गरमी से बिलबिला उठे. गरमी से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे और पंखे व कूलर से राहत पाने की कोशिश करते दिखे. पसीने से तर-बतर लोगों को पंखे व कूलर से भी राहत नहीं मिल पा रही थी. जिले के न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी हुई है और वह 28 डिग्री रहा. रविवार की दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटे की स्थिति देखी गयी. गरमी से बचने के लिए लोग छांव ढूंढ़ते देखे गये. दो दिन पूर्व हुई बारिश से लोगों को उम्मीद बंधी थी कि अगले कुछ दिनों तक पारा गिरेगा, मगर असर उल्टा दिख रहा है.
नहीं मिट रही प्यास : पारा चढ़ने से साथ लोगों के हलक सूखने लगे हैं. लोगों की प्यास नहीं मिट पा रही है. हलक तर करने के लिए ठंडा पानी, आइसक्रीम, जूस, लस्सी आदि का सहारा ले रहे हैं, मगर उनकी प्यास मिटने का नाम नहीं ले रही हे. मौसमी फल की बिक्री बढ़ गयी. लोग आम, तरबूज, खीरा,ककड़ी आदि का सेवन कर रहे हैं.
गरमी में होने वाली बीमारियां : लू लगना, जुकाम होना, चक्कर आना, सिर दर्द, घबराहट, डी-हाइड्रेशन, नाक से खून आना, उल्टी-दस्त, हीट स्ट्रोक, घमौरियां.
क्या कहते हैं चिकित्सक
गरमी के दिनों में तेज धूप से शरीर को बचाना जरूरी है.जब भी घर से बाहर निकलें चेहरे व सिर को गमछे से ढंक लें. इस मौसम में पानी खूब पीयें. मौसमी फलों का प्रयोग करें. खाने में तरल पदार्थ का ज्यादा सेवन करें. बासी खाना न खाएं. तबीयत बिगड़ने पर अविलंब चिकित्सक से संपर्क करें.
डॉ सियाशरण प्रसाद, आइएमए के पूर्व अध्यक्ष
घरों में कैद रहने को मजबूर लोगों को कूलर व पंखे से भी राहत नहीं