दवा का किया छिड़काव

मुहिम : तीन साल के दौरान मिले मरीजों वाले प्रखंड चिह्नित बिहारशरीफ : नालंदा जिले में जानलेवा बीमारी कालाजार की रोकथाम के लिए एसपी नामक दवा का स्प्रे किया गया. सरकार की ओर से चिह्नित जिले के 13 प्रखंडों को दवा छिड़काव के लिए चयन किया गया था. तीन साल पहले जिस प्रखंड क्षेत्रों में […]

मुहिम : तीन साल के दौरान मिले मरीजों वाले प्रखंड चिह्नित

बिहारशरीफ : नालंदा जिले में जानलेवा बीमारी कालाजार की रोकथाम के लिए एसपी नामक दवा का स्प्रे किया गया. सरकार की ओर से चिह्नित जिले के 13 प्रखंडों को दवा छिड़काव के लिए चयन किया गया था. तीन साल पहले जिस प्रखंड क्षेत्रों में मरीज प्रतिवेदित हुए थे,उसे मानक आधार बनाकर गांवों की सूची बनायी गयी. जिले के 45 गांवों में माइक्रोप्लान बनाकर जिला मलेरिया व कालाजार विभाग की ओर से दवा छिड़काव किया गया. जिला मलेरिया सह कालाजार पदाधिकारी डॉ रविन्द्र कुमार ने बताया कि दवा छिड़काव का कार्य पूरा हो गया है.
जिले के 13 प्रखंडों के चिंहित गांवों में कालाजार की रोकथाम के लिए दवा छिड़काव कार्य में कुल चार दल लगाये गये थे.हरेक दल में छह-छह सदस्य शामिल किये गये थे.दवा का छिड़काव सही ढंग से करने के लिए गांववार तिथि निर्धारित की गयी थी.चिंहित गांवों के हरेक घर में जाकर कर्मी एसपी नामक दवा का स्प्रे करने का काम किया.
घरों के कमरों के साथ ही पशुधन का निवास स्थल गोशालों में भी इसका छिड़काव किया गया. डीएमओ डॉ कुमार ने बताया कि कालाजार बीमारी अमूमन बालूमक्खी के काटने से ही होती है. यह मक्खी नमी वाली जगहों पर ज्यादा निवास करती हैं. साथ ही अंधेरे वाले स्थानों पर भी इसकी वास होती है.दीवारों के छिद्र में भी बालूमक्खी रहती हैं.उन्होंने बताया कि इस बार एसपी नामक दवा का स्प्रे किया गया है.यह दवा बहुत ही कारगर होती है.इसका असर काफी दिनों तक रहता है. इससे पहले डीडीटी का छिड़काव किया जाता था.पर अब इसकी जगह एसपी नामक दवा आयी है जो काफी कारगर है.
यानी की बालूमक्खी के लार्वा को खत्म करने में सक्षम होती है.
तीन माह तक नहीं करें घरों की पुताई
डीएमओ डॉ.कुमार ने कहा कि जिस प्रखंड के गांवों के घरों में कालाजार की रोकथाम के लिए दवा का स्प्रे किया गया है.संबंधित गृहस्वामी अपने घरों व दीवारों की रंगाई-पुताई करीब तीन माह तक नहीं करें. ताकी दवा स्प्रे का असर निरंतर बना रहा.पुताई करने के बाद दवा का असर खत्म हो जायेगा.लिहाजा बालूमक्खी के जीवाणु की उत्पति होने की आशंका प्रबल हो जाती है
.अतएव लोग पुताई से फिलहाल परहेज करेंगे.उन्होने बताया कालाजार की रोकथाम के लिए जिला कालाजार सह मलेरिया विभाग की ओर से सालभर में दो बार दवा का स्प्रे करने का काम किया जाता है.इस साल पहले चरण का छिड़काव कार्य जिले में पूरा हो चुका है.दूसरे चरण का छिड़काव अमूमन तौर पर सितंबर-अक्टूबर माह में होती है.

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