बच्चेदानी ऑपरेशन प्रकरण के दोषी डॉक्टरों का रद्द होगा लाइसेंस
बिना ऑपरेशन किये ही रुपये की निकासी करने वाले छह क्लीनिकों पर दोहरी कार्रवाई की जायेगी.एफआइआर के साथ उनके लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई भी की जायेगी. वर्ष 2011-12 में बच्चेदानी ऑपरेशन के नाम पर चिकित्सकों द्वारा गड़बड़ी करने का आरोप है.उक्त साल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत जिले के 42 अस्पतालों को इलाज करने के लिए अनुबंधित किया गया था.
बिहारशरीफ. गलत ढंग से बच्चेदानी का ऑपरेशन करके मालामाल होने वाले चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है. वैसे चिकित्सकों पर एफआइआर करने के साथ ही उनके लाइसेंस को रद्द करने की सिफारिश एमसीआइ से की जायेगी. बच्चेदानी ऑपरेशन से मामलों की फाइल एक बार फिर से खुल गयी है. बिना ऑपरेशन किये ही रुपये की निकासी करने वाले छह क्लीनिकों पर दोहरी कार्रवाई की जायेगी.एफआइआर के साथ उनके लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई भी की जायेगी. वर्ष 2011-12 में बच्चेदानी ऑपरेशन के नाम पर चिकित्सकों द्वारा गड़बड़ी करने का आरोप है.उक्त साल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत जिले के 42 अस्पतालों को इलाज करने के लिए अनुबंधित किया गया था.
इलाज के बाद शिकायत की गयी थी. बिना ऑपरेशन किये ही बीमा के रुपये की निकासी कुछ क्लीनिकों द्वारा कर ली गयी है. शिकायत के आलोक उस समय मामले की जांंच करायी गयी थी. तत्कालीन डीएम के आदेश पर सिविल सर्जन के द्वारा गठित टीम के द्वारा सदर अस्पताल में इलाज कराने वाली महिलाओं की मेडिकल जांच करायी गयी थी. जांच के लिए 36 महिलाएं उपस्थित हुई थी. मेडिकल के बाद यह खुलासा हुआ था कि महिलाओं की बच्चेदानी का ऑपरेशन नहीं किया गया था.
मेडिकल के समक्ष महिलाओं ने भी स्वीकार किया था कि उसका ऑपरेशन नहीं किया गया था.कुछ ने यह भी कहा था ्रकि बिना बताये ही ऑपरेशन कर दिया गया था, साथ ही कम उम्र की महिलाओं की भी बच्चेदानी निकाल ली गयी थी. और अंगूठे का निशान ले लिया गया था. बच्चेदानी ऑपरेशन के लिए निर्धारत राशि 12 हजार रुपये की निकासी कर ली गयी है. जांच के बाद उक्त रिपोर्ट को विभाग के पास भेज दिया गया था.
रिपोर्ट के बाद आदेश आने का इंतजार किया जा रहा था. विभाग द्वारा आदेश आने के बाद एफआईआर करने की पहल भी की गयी थी. फिर बाद में फाइल दब गयी थी.राष्ट्रीय मानवाधिकार द्वारा इस प्रकरण में हस्तक्षेप किये जाने के बाद मामला फिर से गरमा गया है. साथ ही कार्रवाई चरम सीमा पर पहुंच गयी है. हालांकि इस मामले में बीमा कंपनी को एफआइआर करने का आदेश दिया गया था.अधिकारियों द्वारा मंथन किये जाने के बाद अब सीएस को यह काम सौंपा गया है. अधिकारियों की सोच है कि स्वास्थ्य से मामला जुड़ा होने के कारण एमसीआइ से सिफारिश करना सहज होगा.
छह हजार महिलाओं की निकाल ली गयी थी बच्चेदानी:
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा से मरीज भले ही चंजा नहीं हुए है लेकिन कुछ चिकित्सक योजना का लाभ लेकर मालामाल अवश्य हो गये है. फिलहाल तो छह क्लीनिकों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है. जांच के बाद कई चिकित्सकों की गर्दन फंस सकती है. उक्त अवधि में छह हजार महिलओं की बच्चेदानी निकाल ली गयी थी. उक्त साल में बच्चेदानी ऑपरेशन के सभी मामलों की जांच फिर से की जायेगी.
