विरासतों को सहेजने की कवायद

बिहार विरासत विकास समिति ने जिला प्रशासन से मांगा प्रतिवेदन बिहारशरीफ : विरासतों को सहेज कर ही अतीत व वर्तमान को यादगार बनाया जा सकता है. विरासतों को सहेजने की कवायद सरकार द्वारा की जा रही है. वैसे तो जिले में एक से बढ़कर एक विरासत हैं. लेकिन कई सांस्कृतिक व धार्मिक स्थल देश-विदेश में […]

बिहार विरासत विकास समिति ने जिला प्रशासन से मांगा प्रतिवेदन

बिहारशरीफ : विरासतों को सहेज कर ही अतीत व वर्तमान को यादगार बनाया जा सकता है. विरासतों को सहेजने की कवायद सरकार द्वारा की जा रही है. वैसे तो जिले में एक से बढ़कर एक विरासत हैं.
लेकिन कई सांस्कृतिक व धार्मिक स्थल देश-विदेश में प्रख्यात हो चुके है. जिले के तीन प्रमुख सांस्कृतिक ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किये जाने की पहल शुरू कर दी गयी है.जिले के बिहारशरीफ के बाबा मणिराम अखाड़ा व बाबा मखदूम साहेब की मजार व सिलाव के पनहेसा के मजार को पर्यटन स्थल घोषित किये जाने की कवायद की जा रही है. बिहार विरासत विकास समिति द्वारा निर्णय लिया गया है कि उक्त तीनों स्थलों को पर्यटन स्थल घोषित की जाये.
उक्त तीनों को पर्यटन स्थल घोषित करने की दिशा में क्या कठिनाई है इस संबंघ में जिला प्रशासन से प्रतिवेदन की मांग की गयी है. बिहार विधानसभा के उप सचिव ने प्रशासन को पत्र भेजकर दस दिनों में प्रतिवेदन उपलब्घ कराने को कहा हैं. इन तीनों स्थलों का काफी महत्व है. सभी धर्म के लोग इन स्थलों पर मत्था टेकने जाते हैं. बाबा मणिराम का अखाड़ा शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित है. बाबा के नाम पर ही इस स्थल का नामकरण है. जबकि शहर के दक्षिण छोर पर ही बड़ी दरगाह मोहल्ले में बाबा मखदूम साहेब का मजार है. बाबा मणिराम के अखाड़े पर श्रद्वा से लोग लंगोट अर्पित करते हैं. जबकि बाबा मखदूम साहेब के मजार पर चादरपोशी की जाती हैं. बताया जाता है कि दोनोंं अपने-अपने प्रसिद्धियोंं के लिए याद किये जाते हैं. पर्यटन स्थल बनने से इस क्षेत्र का काफी विकास होगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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