बिहारशरीफ : हाइवे पर दारु पार्टी. सुन कर बड़ा आश्चर्य लगता है. लेकिन यह सोलह आने सही है. ऐसी दावत यहां रोज होती है. बस सूर्य के डूबने का इंतजार होता है. दारु पार्टी की इस कमाई से ढाबे वाले मालामाल हो रहे हैं. फायदे की कुछ कमाई बड़ा बाबू की पॉकेट तक भी जाती […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
बिहारशरीफ : हाइवे पर दारु पार्टी. सुन कर बड़ा आश्चर्य लगता है. लेकिन यह सोलह आने सही है. ऐसी दावत यहां रोज होती है. बस सूर्य के डूबने का इंतजार होता है. दारु पार्टी की इस कमाई से ढाबे वाले मालामाल हो रहे हैं.
फायदे की कुछ कमाई बड़ा बाबू की पॉकेट तक भी जाती है. उत्पाद विभाग को तो काई टेंशन ही नहीं है. जिले से लगने वाले एनएच-31 पर अस्सी फीसदी ढाबों में यह रोजाना की कहानी है. जहां नित्य दिन दारु की बेजोड़ पार्टियां चलती हैं. ढावे वाले इसका पूरा इंतजाम करते हैं.महंगी से महंगी शराब की बड़ी खेप यहां आन डिमांड मौजूद रहती है.
पांच थाने व दो ओपी के अधीन है हाइवे : नालंदा जिला से लगने वाला राष्ट्रीय राज मार्ग -31 दो ओपी व पांच थाने के अधीन आता है.हाइवे की सुरक्षा इन्हीं के भरोसे रहती है. एक अनुमान के मुताबिक हाइवे पर करीब सौ से अधिक ढ़ावे हैं,जिसमें करीब अस्सी ऐसे ढाबे हैं, जहां ग्राहकों को शराब परोसे जाते हैं.
शराब नहीं परोसने वाले एक ढाबे का संचालक कहता है कि हमारे ढाबे पर भीड़ सिर्फ इसलिए कम रहती है,क्योंकि हम शराब नहीं बेचते हैं,जहां शराब की बिक्री होती है,वहां ग्राहकों की भीड़ भी ज्यादा होती है.बताया जाता है कि ढाबे के आसपास पान-सिगरेट बेचे जाने वाले स्थानों पर ढावे के संचालक शराब की खेप रखते हैं.
शराब के लिए बरातियों से भरा रहता है ढाबा : इन दिनों शादी-ब्याह के सीजन में शराब के लिए बरातियों की खासी भीड़ ढावे पर भरी रहती है. मैनेज शब्द का हवाला देते हुए एक ढाबे का संचालक कहता है कि यहां सब चलता है. कमाई हम करते हैं, देना साहब को भी पड़ता है.