छठ व्रत की तीसरे दिन मंगलवार को व्रती द्वारा डूबते हुए सूर्य को अर्घ प्रदान किया जोयगा. इस दिन छठ का प्रसाद बनाया जाता है. प्रसाद के रूप में ठेकुआ, टिकरी, चावल का लड्डू आदि होते हैं. इसके अलावा चढ़ावा के रूप में बाजार से खरीदा गया सांचा, नारियल व फल भी प्रसाद में शामिल होता है. इसके लिए मंडियों में लोगों की भीड़ जुट रही है.
मंगलवार की संध्या को तैयारी व व्यवस्था कर बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है. छठव्रती के साथ परिवार व पड़ोस के लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर जाते हैं. सभी छठव्रती तालाब या नदी किनारे इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से अर्घ्य प्रदान करते हैं. भगवान सूर्य को जल व कच्चा दूध से अर्घ्य दिया जाता है तथा छठी मइया के प्रसाद भरे सूप की पूजा की जाती है. इस दौरान अर्घ्य प्रदान करने वाले स्थानों पर मेले का दृश्य बन जाता है.
