केलवा के पात पर उगऽ हो सूरजदेव...

बिहारशरीफ : लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ व्रत के दूसरे दिन सोमवार को छठव्रतियों ने खरना का प्रसाद ग्रहण किया. व्रतधारी दिन भर उपवास रखने के बाद शाम में भोजन करते हैं. इसे खरना अथवा लोहंडा कहा जाता है. खरना का प्रसाद लेने के लिए सगे-संबंधियों के अलावा दोस्तों, पड़ोसियों को भी आमंत्रित […]

बिहारशरीफ : लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ व्रत के दूसरे दिन सोमवार को छठव्रतियों ने खरना का प्रसाद ग्रहण किया. व्रतधारी दिन भर उपवास रखने के बाद शाम में भोजन करते हैं. इसे खरना अथवा लोहंडा कहा जाता है. खरना का प्रसाद लेने के लिए सगे-संबंधियों के अलावा दोस्तों, पड़ोसियों को भी आमंत्रित किया गया.

प्रसाद के रूप में गन्ने के रस अथवा गुड़ से बनी चावल की खीर के साथ दूध,चावल का पिट्ठा और घी-चुपड़ी रोटी बनायी गयी. कई जगहों पर अरवा चावल व चना का दाल भी बनाया गया. प्रसाद में नमक या चीनी का प्रयोग नहीं किया जाता है. नमक के जगह सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के लिए सोमवार की संध्या से देर रात्रि तक लोगों का व्रतियों के घर आना-जाना होता रहा. लोग परिचितों, दोस्तों को बुला-बुला कर खरना का प्रसाद ग्रहण कराया.

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