.. और फिर भी जिंदगी रौनक है उनके गुलजार से

बिहारशरीफ : मो नौशाद अली एक ऐसा व्यक्तित्व है,जो समाज को अपनी सोच के अनुरूप देखना चाहता है.अहंकार,द्वेष,लालच व नकारात्मक सोच रखने वालों के लिए यह शख्स एक उदाहरण है.इन्हें जानने वाले इनकी आदर करते हैं,अदब से लोग इन्हें सलाम व प्रणाम करते हैं. रांची रोड के मीर कंप्लेक्स मार्केट के एक छोटे से दुकान […]

बिहारशरीफ : मो नौशाद अली एक ऐसा व्यक्तित्व है,जो समाज को अपनी सोच के अनुरूप देखना चाहता है.अहंकार,द्वेष,लालच व नकारात्मक सोच रखने वालों के लिए यह शख्स एक उदाहरण है.इन्हें जानने वाले इनकी आदर करते हैं,अदब से लोग इन्हें सलाम व प्रणाम करते हैं.
रांची रोड के मीर कंप्लेक्स मार्केट के एक छोटे से दुकान में प्लास्टिक की बाल्टी व ड्रम बेच कर परिवार के लिए रोटी की जुगत में सुबह से शाम तक पसीना बहाना इनका प्रतिदिन का काम है.पांचों वक्त के नवाजी मो नौशाद वर्ष 1978 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर व्यवसायी से जुड़ गये.
27 जुलाई 1994 को इनकी शादी डॉली परवीन से हुई. इनकी पत्नी जन्मजात गूंगी व बहरी हैं. यह जानते हुए कि जिस लड़की से यह परिणय सूत्र में बंधने जा रहे हैं व गूंगी व बहरी है,बावजूद इसके उन्होंने शादी के लिए हामी भरी. इनके चार संतान हैं,जिसमें से दो पुत्री व एक पुत्र भी गूंगा व बहरा है.
कहते हैं कि फिर भी जिंदगी रौनक है उनके गुलजार से.इनकी पत्नी इनसे इशारे-इशारे में अपनी बात रखती हैं,ईश्वर के प्रति पूरी आस्था रखने वाले नौशाद कहते हैं कि मानवता तो इसी में हैं कि हर कोई अपने संबंधी,परिवार व समाज का ख्याल रखे.कहते हैं कि दहेज गलत चीज है,इसलाम इसकी इजाजत नहीं देता है,इस पाप से लोगों को बचना चाहिए.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >