West Bengal Child Malnutrition: बंगाल चुनाव 2026 में पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा ने कृषि क्षेत्र की बदहाली के बाद अब बच्चों के कुपोषण का मुद्दा उठाया है. ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा देने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाये हैं. इसके लिए मुख्य विपक्षी दल ने राज्यसभा में पूछे गये एक सवाल के जवाब को अपना आधार बनाया है.
भुखमरी ओर कुपोषण की मार झेल रहा बंगाल : भाजपा
भाजपा ने कहा है कि राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में पेश किये गये आंकड़े बंगाल की एक डरावनी तस्वीर पेश कर रहे हैं. भाजपा ने कहा है कि जिस बंगाल को ‘सोनार बांग्ला’ बनाने के सपने दिखाये गये थे, वहां के बच्चे भुखमरी और कुपोषण की मार झेल रहे हैं. राज्य सरकार केंद्र से मिले 5,000 करोड़ रुपए का हिसाब देने में भी नाकाम रही है.
कोलकाता से उत्तर दिनाजपुर तक संकट
संसद के रिकॉर्ड बताते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अपने शहर कोलकाता में स्थिति सबसे बदतर हुई है. कहां की क्या स्थिति है, नीचे पढ़ें.
- कोलकाता का बुरा हाल : शहर में ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ (कद के अनुपात में कम वजन) की दर 17.4 प्रतिशत से बढ़कर 29.3 प्रतिशत हो गयी है. आसान शब्दों में कहें तो कोलकाता में पहले 17.4 प्रतिशत बच्चे ऐसे थे, जिनका वजन उनकी हाईट के अनुपात में कम था, जो अब 29.3 प्रतिशत हो गयी है.
- दक्षिण 24 परगना : यहां बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) 27.3 प्रतिशत से बढ़कर 36.7 प्रतिशत हो गयी है.
- उत्तर दिनाजपुर : इस जिले की स्थिति तो और भी भयावह है. यहां हर 2 में से 1 बच्चा कुपोषण के कारण स्टंटिंग का शिकार है.
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West Bengal Child Malnutrition: 5,000 करोड़ का हिसाब गायब
रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा फंड के इस्तेमाल को लेकर हुआ है. केंद्र सरकार ने पिछले 4 वर्षों में ‘मिशन पोषण 2.0’ के तहत पश्चिम बंगाल को आंगनबाड़ियों, माताओं और बच्चों के पोषण के लिए 5,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की है. राज्य सरकार ने पिछले 2 वित्तीय वर्षों से इस फंड की उपयोगिता रिपोर्ट (Utilisation Report) केंद्र को नहीं भेजी. इस पर भाजपा ने पूछा है कि क्या बच्चों के निवाले का पैसा ‘सिंडिकेट’ और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया?
जंगलमहल और मालदा में पलायन और कुपोषण
पुरुलिया, मालदा और नदिया जैसे जिलों में कुपोषण केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक विफलता बन गयी है. एक ओर टीएमसी नेता विकास का जश्न मना रहे हैं, तो दूसरी ओर बंगाल का भविष्य कुपोषण के कारण ‘बौना’ होता जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल गरीबी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है.
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