ममता राज में बंगाल में कुपोषण काल, कोलकाता में बढ़ी चाइल्ड वेस्टिंग, 5000 करोड़ का हिसाब नहीं : भाजपा

West Bengal Child Malnutrition: राज्यसभा में पेश आंकड़ों के आधार पर बंगाल चुनाव 2026 से पहले भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोला है. आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मिशन पोषण 2.0 के 5000 करोड़ रुपए का यूटिलाइजेशन रिपोर्ट पेंडिंग है. कोलकाता और उत्तर दिनाजपुर में चाइल्ड स्टंटिंग और वेस्टिंग के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से सियासी घमासान मच गया है.

West Bengal Child Malnutrition: बंगाल चुनाव 2026 में पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा ने कृषि क्षेत्र की बदहाली के बाद अब बच्चों के कुपोषण का मुद्दा उठाया है. ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा देने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाये हैं. इसके लिए मुख्य विपक्षी दल ने राज्यसभा में पूछे गये एक सवाल के जवाब को अपना आधार बनाया है.

भुखमरी ओर कुपोषण की मार झेल रहा बंगाल : भाजपा

भाजपा ने कहा है कि राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में पेश किये गये आंकड़े बंगाल की एक डरावनी तस्वीर पेश कर रहे हैं. भाजपा ने कहा है कि जिस बंगाल को ‘सोनार बांग्ला’ बनाने के सपने दिखाये गये थे, वहां के बच्चे भुखमरी और कुपोषण की मार झेल रहे हैं. राज्य सरकार केंद्र से मिले 5,000 करोड़ रुपए का हिसाब देने में भी नाकाम रही है.

कोलकाता से उत्तर दिनाजपुर तक संकट

संसद के रिकॉर्ड बताते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अपने शहर कोलकाता में स्थिति सबसे बदतर हुई है. कहां की क्या स्थिति है, नीचे पढ़ें.

  • कोलकाता का बुरा हाल : शहर में ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ (कद के अनुपात में कम वजन) की दर 17.4 प्रतिशत से बढ़कर 29.3 प्रतिशत हो गयी है. आसान शब्दों में कहें तो कोलकाता में पहले 17.4 प्रतिशत बच्चे ऐसे थे, जिनका वजन उनकी हाईट के अनुपात में कम था, जो अब 29.3 प्रतिशत हो गयी है.
  • दक्षिण 24 परगना : यहां बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) 27.3 प्रतिशत से बढ़कर 36.7 प्रतिशत हो गयी है.
  • उत्तर दिनाजपुर : इस जिले की स्थिति तो और भी भयावह है. यहां हर 2 में से 1 बच्चा कुपोषण के कारण स्टंटिंग का शिकार है.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

West Bengal Child Malnutrition: 5,000 करोड़ का हिसाब गायब

रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा फंड के इस्तेमाल को लेकर हुआ है. केंद्र सरकार ने पिछले 4 वर्षों में ‘मिशन पोषण 2.0’ के तहत पश्चिम बंगाल को आंगनबाड़ियों, माताओं और बच्चों के पोषण के लिए 5,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की है. राज्य सरकार ने पिछले 2 वित्तीय वर्षों से इस फंड की उपयोगिता रिपोर्ट (Utilisation Report) केंद्र को नहीं भेजी. इस पर भाजपा ने पूछा है कि क्या बच्चों के निवाले का पैसा ‘सिंडिकेट’ और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया?

जंगलमहल और मालदा में पलायन और कुपोषण

पुरुलिया, मालदा और नदिया जैसे जिलों में कुपोषण केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक विफलता बन गयी है. एक ओर टीएमसी नेता विकास का जश्न मना रहे हैं, तो दूसरी ओर बंगाल का भविष्य कुपोषण के कारण ‘बौना’ होता जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल गरीबी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है.

इसे भी पढ़ें

बंगाल में SIR: हर दिन 1.75 से 2 लाख लोगों के दस्तावेज जांच रहे 700 जज, 47 लाख आपत्तियों का हुआ निपटारा

एक-तिहाई बच्चे कुपोषण के शिकार

किसानों के लिए ‘फांसी का फंदा’ बन गया बंगाल का ‘सोना’, 15 साल में 136 मौत पर भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार को घेरा

बंगाल में ओवैसी की दहाड़- ममता दीदी को लगेगा करारा झटका, मुसलमानों को वोट बैंक समझा, इंसान नहीं

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >