हिलसा व्यवहार न्यायालय में पहली बार हुई फांसी की सजा

हिलसा (नालंदा) : नरबलि के मामले में हिलसा व्यवहार न्यायालय में सुनायी गयी फांसी की सजा यहां की पहली घटना है. अदालत के सृजन के बाद आज सैकड़ों मामले में कारावास की सजा सुनायी गयी, लेकिन किसी भी मामले में फांसी की सजा नहीं सुनायी गयी थी. शुक्रवार को हिलसा के तृतीय अपर जिला एवं […]

हिलसा (नालंदा) : नरबलि के मामले में हिलसा व्यवहार न्यायालय में सुनायी गयी फांसी की सजा यहां की पहली घटना है. अदालत के सृजन के बाद आज सैकड़ों मामले में कारावास की सजा सुनायी गयी, लेकिन किसी भी मामले में फांसी की सजा नहीं सुनायी गयी थी.

शुक्रवार को हिलसा के तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र मालवीय द्वारा फांसी की सजा सुनाये जाने के बाद जघन्य घटनाओं को अंजाम देने वाले शातिर अपराधियों के चेहरे पर भय व्याप्त हो गया है. दूसरी ओर अपने दो वर्षीय अबोध बच्चे की बलि देने से मर्माहत पिता रविंद्र रविदास ने अदालत के इस फैसले से राहत की सांस ली है.
पुत्र की मौत से आहत एवं गरीबी की मार से पूरी तरह से टूट चुके रविंद्र रविदास का कहना है कि पुत्र को वापस लाना संभव नहीं है. लेकिन अदालत द्वारा इस कुकृत्य को अंजाम देने वाले हैवान को सजा-ए- मौत की सजा सुनाये जाने से न्यायालय के प्रति उनकी आस्था और बढ़ी है. घटना के संबंध में बताया जाता है कि रविंद्र रविदास के दो वर्षीय पुत्र इंद्रजीत कुमार की बलि चढ़ाने के लिए उसके ही ग्रामीण अमीन मांझी ने एक चिमनी भट्ठा के मालिक के हाथों 15 हजार में बेच दिया था.
इस मामले में भट्ठा मालिक गुड्डू कुमार तथा ठेकेदार अवध बाबा चौहान के साथ अमीन की मां शांति देवी को भी नामजद आरोपित बनाया गया. इधर फांसी की सजा सुनाये जाने के बाद मुदई रविंद्र रविदास के परिवार वालों के सामने सुरक्षा की समस्या उत्पन्न हो गयी है. फरार अभियुक्तों द्वारा पूर्व में भी परिवार को धमकियां दी गयी थी.

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