एसएलओ ने समीक्षा में पायी बेहतर उपलब्धि
बिहारशरीफ : बेहतर चिकित्सा व्यवस्था संधारण कार्य में नालंदा जिले को अव्वल स्थान प्राप्त हुआ है. यह उपलब्धि जिला स्वास्थ्य विभाग के जिला लेप्रोसी निवारण विभाग को हासिल हुआ है. चालू वित्तीय वर्ष के चिकित्सा व्यवस्था को सफल संचालन के लिए यह कामयाबी मिली है. इस कामयाबी पर संबंधित विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मियों में खुशी देखी जा रही है.
सोमवार को राज्य लेप्रोसी निवारण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार पांडेय व अन्य अधिकारियों ने पटना में सूबे के हरेक जिला लेप्रोसी निवारण कार्यालय के कार्यों की समीक्षा की. समीक्षा के दौरान नालंदा जिले की उपलब्धि बेहतर पायी गयी. चिकित्सा सेवा से लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन में नालंदा अन्य जिलों की अपेक्षा आगे रहा. इस तरह एसएलओ ने नालंदा जिला लेप्रोसी कार्यक्रमों के सफल संचालन पर संतोष जताते हुए इसे अव्वल स्थान सूबे में प्रदान किया.
एसएलओ डाॅ पांडेय ने जिले में लेप्रोसी के मरीजों की चिकित्सा सेवा भी बेहतर पायी. समीक्षा के दौरान उन्होंने पाया कि संदिग्ध मरीजों की पहचान करने से लेकर उसका इलाज की व्यवस्था भी सुदृढ़ है.
आशा ने खोजे 453 मरीज
चालू वित्तीय साल में अब तक नालंदा जिले में लेप्रोसी के नये मरीजों की खोज कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ताओं की उपलब्धि बेहतर रही है. समीक्षा के दौरान पाया गया कि आशा ने इस साल अब तक जिले में 453 लेप्रोसी के नये मरीजों की पहचान हुई है. नये मरीजों की खोज के एवज में 40 आशा को ढाई सौ के हिसाब से राशि का भुगतान किया जा चुका है. शेष के भुगतान की प्रक्रिया जारी है. नये मरीजों की पहचान होने के बाद आशा को प्रति रोगी ढाई सौ रुपये दिये जाते हैं. साथ ही डोज के मुताबिक दवा खिलाने के एवज में चार सौ रुपये भी दिये जाते हैं. यह राशि लेप्रोसी के पीबी रोगी को दवा खिलाने के एवज में दी जाती है.
इसके लिए डेढ़ सौ आशा को भुगतान किया जा चुका है. इसी तरह लेप्रोसी एमबी के रोगी को दवा खिलाने के एवज में 600 रुपये दिये जाते हैं. अब तक 118 आशा को इस राशि का भुगतान किया जा चुका है. जिला लेप्रोसी निवारण पदाधिकारी डॉ रवींद्र कुमार ने बताया कि यह उपलब्धि सभी कर्मियों की मेहनत से ही हासिल हुई है. आशा है कि इसी तरह यहां के कर्मी मेहनत करते रहेंगे तो जिले का नाम सूबे में ही नहीं देश में भी रोशन होगा.
