केवट गिरोह का सरगना गिरफ्तार

कार्रवाई. दर्जनों लूट व डकैती कॉड में है आरोपित बिहारशरीफ : नालंदा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने जिले के कुख्यात अपराधी अरविंद केवट को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार अभियुक्त जिले में केवट नाम से एक बड़ा गैंग संचालित करता है. उसके गैंग में करीब पचास से अधिक अपराधी शामिल […]

कार्रवाई. दर्जनों लूट व डकैती कॉड में है आरोपित

बिहारशरीफ : नालंदा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने जिले के कुख्यात अपराधी अरविंद केवट को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार अभियुक्त जिले में केवट नाम से एक बड़ा गैंग संचालित करता है. उसके गैंग में करीब पचास से अधिक अपराधी शामिल है. सड़क लूट व डकैती के दर्जनों कांड में इसके खिलाफ नालंदा व पटना के विभिन्न थानों में दर्ज हैं. शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उक्त बातों की जानकारी देते हुए नालंदा के पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार पोरिका ने बताया कि अरविंद पर स्थायी वारंट निर्गत था. इसकी गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की कई टीम बनायी गयी थी.
शुक्रवार की देर रात्रि सूचना के बाद चंडी थानाध्यक्ष कमलजीत, चंडी थाने के सहायक अवर निरीक्षक अजय सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मियों की मदद से इसकी गिरफ्तारी चंडी थाना क्षेत्र से कर ली गयी. गिरफ्तार अरविंद की निशानदेही पर पुलिस ने बिंद थाना क्षेत्र के बकरा गांव से पप्पू केवट के घर छापेमारी कर लूट की एक मोबाइल भी बरामद किया है. प्रेसवार्ता के दौरान एसपी ने बताया कि अरविंद केवट की गिरफ्तारी नालंदा पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं थी. यह अपने गैंग के साथ नालंदा, पटना, गया, नवादा सहित अन्य जिलों में सड़क लूट व डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया करता था. गिरफ्तारी आरोपित चंडी थाना क्षेत्र के मलबिगहा गांव निवासी फौजदारी केवट का पुत्र है. एसपी ने बताया कि पुलिस इसके गैंग में शामिल अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर प्रयासरत है. गिरफ्तारी को लेकर तीन विशेष टीम का गठन किया गया है. इसके खिलाफ चंडी थाने में पांच, खुदागंज थाने में एक, नवादा के हिसुआ थाने में एक व पटना के पांच विभिन्न थानों में आपराधिक मामले दर्ज हैं. प्रारंभिक पूछताछ में इसने कई विशेष जानकारी पुलिस को उपलब्ध करायी है. नये-नये युवाओं को पैसे का लालच देकर अपने गैंग में भर्ती किया करता था.
नहीं रखता था मोबाइल
सबसे मजे की बात यह है कि कुख्यात अरविंद केवट अपराध करने के वक्त अपना मोबाइल अपने पास नहीं रखता था.मोबाइल फोन के इसके पास नहीं होने से इसकी प्राइम लोकेश की जानकारी पुलिस को नहीं मिल पाती थी. यह अपने गैंग के दूसरे सदस्यों को भी अपराध के वक्त अपना मोबाइल पास में नहीं रखने की सीख देता था. क्राइम के वक्त सभी अपने मोबाइल को घर में ही छोड़ दिया करते थे.

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