सुरक्षा के मानक का नहीं हो रहा पालन

बिहारशरीफ : गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में छात्र की मौत से जिले के अभिभावकों व स्कूल संचालकों में भी अब बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है. इस घटना ने जिले में संचालित सैकड़ों निजी विद्यालयों की आंखें खोल दी है. जिन विद्यालयों में अब तक छात्रों की सुरक्षा को महत्व नहीं दिया […]

बिहारशरीफ : गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में छात्र की मौत से जिले के अभिभावकों व स्कूल संचालकों में भी अब बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है. इस घटना ने जिले में संचालित सैकड़ों निजी विद्यालयों की आंखें खोल दी है. जिन विद्यालयों में अब तक छात्रों की सुरक्षा को महत्व नहीं दिया जा रहा था. वैसे विद्यालय भी इस विषय में चिंतित नजर आ रहे हैं. हालांकि इसके बावजूद जिले के बच्चे लचर सुरक्षा व्यवस्था वाले निजी विद्यालयों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

सीबीएसई मान्यता प्राप्त अधिकांश स्कूलों की स्थिति तो संतोषजनक कही जा सकती है, लेकिन इसके विपरीत बिहार सरकार से मान्यता प्राप्त अथवा बिना मान्यता के संचालित सैकड़ों निजी विद्यालयों में विद्यालय संचालक ही बच्चों की सुरक्षा संबंधी बातों का ख्याल रखते हैं. बच्चों की क्लास में सीसीटीवी कैमरे, प्रवेश द्वार पर सुरक्षा गार्ड, अग्निशमन उपकरण, प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं सिर्फ सीबीएसई विद्यालयों में ही देखने को मिलती है. छोटे निजी विद्यालयों की स्थिति तो शिक्षा तथा सुरक्षा दोनों स्तरों पर काफी कमजोर है.

शहर में आज भी कई निजी विद्यालयों के एक छोटे रिक्शे पर दर्जन भर बच्चों को ठूंस कर लाया-ले जाया जाता है. वर्ग कक्ष में भी बच्चे क्षमता से अधिक बैठाये जाते हैं. यहां अभिभावक संतुष्ट नहीं रहने के बावजूद कम खर्च के कारण अपने बच्चों को पढ़ने भेजते हैं.

सीबीएसई स्कूलों की स्थिति संतोषजनक : जिले के सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूलों की स्थिति संतोषजनक है. स्थानीय आरपीएस स्कूल, कैम्ब्रिज स्कूल, सदर आलम मेमोरियल सेकेंडरी स्कूल, डैफोडिल पब्लिक स्कूल आदि में पर्याप्त संख्या में सुरक्षा गार्ड मौजूद है. प्रवेश द्वार पर रजिस्टर में नाम, काम, मोबाइल, नंबर आदि दर्ज कराने के बाद किसी व्यक्ति को स्कूल के चप्पे-चप्पे में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. जगह-जगह पर अग्निशमन उपकरण तथा प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था उपलब्ध है. कैम्ब्रिज स्कूल के सचिव अरविंद कुमार तथा डैफोडिल स्कूल के निदेशक रविचंद ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है. इसके लिए स्कूल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं.
स्थानीय तथा परिचित लोग ही रहते हैं ड्राइवर : अधिकांश निजी विद्यालयों के संचालकों का कहना है कि वह स्कूल वाहनों के लिए परिचित लोगों को ही ड्राइवर तथा कंडक्टर के रूप में रखते हैं. उनका ड्राइवर लाइसेंस भी स्कूल द्वारा जमा कराया जाता है. इसके विपरीत गार्ड के रूप में सिक्यूरिटी कंपनी के सुरक्षा गार्ड को जगह दी जाती है. बाहरी लोगों को विद्यालय में नहीं रखा जाता है. सीबीएसई स्कूलों के वाहन भी रजिस्टर्ड हैं तथा सुरक्षा के मानकों का ख्याल रखा जाता है. स्कूल में मौजूद गार्ड तथा गेम टीचर की मौजूदगी में ही बच्चे खेलकूद में शामिल होते हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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