स्कूल में पुस्तकालय व प्रयोगशाला नहीं

कामचलाऊ बुनियादी सुविधाओं से विद्यार्थी हो रहे हकलान कई विषयों के शिक्षक मौजूद नहीं बिहारशरीफ : जिले के माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती, भवन, उपस्कर, प्रयोगशाला, पुस्तकालय व अन्य बुनियादी सुविधाओं पर नजर डाली जाये, तो इसके पीछे की सच्चाई सामने आ जाती हैं. जिले के कुल 194 माध्यमिक विद्यालयों में […]

कामचलाऊ बुनियादी सुविधाओं से विद्यार्थी हो रहे हकलान
कई विषयों के शिक्षक मौजूद नहीं
बिहारशरीफ : जिले के माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती, भवन, उपस्कर, प्रयोगशाला, पुस्तकालय व अन्य बुनियादी सुविधाओं पर नजर डाली जाये, तो इसके पीछे की सच्चाई सामने आ जाती हैं. जिले के कुल 194 माध्यमिक विद्यालयों में से 110 विद्यालयों को वर्तमान में उच्च माध्यमिक का दर्जा प्राप्त है. वैसे सरकार के शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार सभी माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक का दर्जा दिया जाना अनिवार्य है. यदि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा के 30 उच्च विद्यालयों को छोड़ दिया जाय तो शेष बचे सभी 166 उच्च विद्यालयों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई होनी चाहिए थी.
वर्तमान में 110 उच्च माध्यमिक विद्यालय जिले में संचालित है तथा शेष विद्यालयों में भी इंटर की पढ़ाई शुरू होने वाली है. यदि इन विद्यालयों में मौजूद जरूरी संसाधनों पर नजर डाली जाये, तो चौकाने वाली सच्चाई सामने आती है. जिले के कुल 161 उच्च विद्यालयों में शिक्षकों के 1767 स्वीकृत पदों के विरुद्ध वर्तमान में मात्र 1234 शिक्षक ही मौजूद है. इसी प्रकार जिले में संचालित 110 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के कुल 1032 पद स्वीकृत है. इनमें से मात्र 325 शिक्षक ही विद्यालयों में कार्यरत है. ऐसे में माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए कई विषय के शिक्षक मौजूद नहीं हैं. विद्यालयों की जर्जर स्थिति, चहारदीवारी का अभाव, शौचालय, पेयजल आदि बुनियादी जरूरते भी कई विद्यालयों में मौजूद नहीं है. इससे विद्यालयों की शिक्षा की स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल नही है.
जल्दीबाजी में राज्य सरकार ने माध्यमिक विद्यालयों को किया उत्क्रमित :
जिले में इंटरमीडिएट स्कूलों की कमी को पूरी करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा आनन-फानन में सभी माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक विद्यालयों मेंे उत्क्रमित करने का फरमान जारी कर दिया गया, जबकि विद्यालयों में भवन, शिक्षक, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, उपस्कर, शौचालय, पेयजल, चहारदीवारी आदि की उपलब्धता सुनिि›त नही की जा सकी.
नतीजा यह है कि अधिकांश उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मात्र एक-दो शिक्षकों के भरोसे इंटरमीडिएट की पढ़ाई की जा रही है. कई ऐसे भी विद्यालय हैं जहां बिना शिक्षक के भी इंटरमीडिएट में एडमिशन-फॉर्म भरने का काम किया जा रहा है. माध्यमिक विद्यालयों में भी कमोवेश यही स्थिति है. ऐसे में इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना ही बेमानी है.

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