पीएम श्री स्कूलों में मध्य विद्यालयों के मर्जर का विरोध, एसयूसीआई ने उठाये सवाल

सोशल यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) ने बिहार में पीएम श्री स्कूलों के साथ मध्य विद्यालयों के विलय की नीति का कड़ा विरोध किया है. पार्टी का कहना है कि इस मर्जर से छात्र-छात्राओं, खासकर बालिकाओं की सुरक्षा और आवागमन पर गंभीर असर पड़ेगा, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है.

PM Shri School: सोशल यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) ने बिहार में पीएम श्री स्कूल योजना के तहत चयनित उच्च विद्यालयों के साथ आसपास के मध्य विद्यालयों के कक्षा छह से आठ तक के छात्रों के मर्जर की नीति का विरोध किया है. पार्टी के राज्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने बयान जारी कर कहा कि इस व्यवस्था से छात्र-छात्राओं, खासकर बालिकाओं को अपने नजदीकी स्कूल छोड़कर दूर स्थित विद्यालयों में जाना पड़ सकता है. इससे उनके सामने सुरक्षा और आवागमन की समस्या उत्पन्न होगी.

मध्य विद्यालयों को समाप्त करने की कोशिश का आरोप

अरुण कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार स्कूल मर्जर की नीति के माध्यम से मध्य विद्यालयों को धीरे-धीरे समाप्त करने और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए नजदीकी विद्यालयों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि स्कूल दूर होने की स्थिति में छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है. खासकर नियमित आवागमन में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं.

बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी उठाया मुद्दा

एसयूसीआई ने पीएम श्री विद्यालयों में पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं नहीं होने का भी आरोप लगाया. पार्टी का कहना है कि जब पहले से उपलब्ध विद्यालयों में आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, तो अतिरिक्त छात्रों को वहां स्थानांतरित करने से कक्षाओं पर दबाव बढ़ेगा और पठन-पाठन का माहौल प्रभावित होगा.

पार्टी ने केंद्र और राज्य सरकार से स्कूलों के मर्जर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. साथ ही सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियों को वापस लेने और सभी सरकारी विद्यालयों में पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.

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By Kumar gaurav

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