हुनरमंद हाथों को नहीं मिल रहा काम, आजीविका का संकट

Skilled hands are not getting work

सर्राफा बाजार का बदला ट्रेंड, बाहर की कंपनी बना रही आधुनिक ज्वेलरी

मनपसंद डिजायन लेकर पहुंच रहे ग्राहक, दुकानदार बाहर से करा रहे मेकिंग

उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर

शहर का सोना-चांदी व्यवसाय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. जहां एक ओर ग्राहकों की पसंद में आये परिवर्तन ने बाजार को आधुनिकता की ओर धकेला है, वहीं दूसरी ओर इसका सीधा असर स्थानीय कारीगरों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है. परंपरागत ज्वेलरी का क्रेज कम होने से सैकड़ों कारीगरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. पहले जहां ग्राहक दुकानों में उपलब्ध डिस्प्ले में से अपनी पसंद की ज्वेलरी चुनते थे या परंपरागत गहनों को तरजीह देते थे, अब यह चलन पूरी तरह से बदल गया है. आज के ग्राहक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ज्वेलरी के नये डिजाइन सेलेक्ट करते हैं और फिर इन्हीं डिजाइन को लेकर शहर की ज्वेलरी दुकानों पर पहुंच रहे हैं. दुकानदार इन डिजाइन को बाहर की कंपनियों से ग्राहकों द्वारा बताये गये वजन के अनुसार बनवाकर उपलब्ध करा रहे हैं. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह आधुनिक तकनीक से की गई जटिल और बारीक नक्काशी है, जिसे स्थानीय कारीगर देने में असमर्थ हैं. हाथ से बनी परंपरागत ज्वेलरी की अपनी खूबसूरती और बारीकी होती है, लेकिन ऑनलाइन उपलब्ध डिजाइन में मशीन द्वारा की गई फिनिशिंग अधिक होत है, जो ग्राहकों को ज्यादा आकर्षित कर रहा है.

700 सर्राफा कारीगरों के पास काम की कमी

सर्राफा बाजार में करीब 700 कारीगर हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह से ज्वेलरी निर्माण पर निर्भर करती थी. ये कारीगर पीढ़ियों से इस काम से जुड़े हुए हैं और अपनी कला के माध्यम से शहर की पहचान बने हुए थे. लेकिन बाजार के इस नए ट्रेंड ने उनके काम में भारी कमी ला दी है. कई कारीगरों को अब मुश्किल से ही काम मिल पा रहा है. दुकानदारों का कहना है कि वह ग्राहकों की पसंद को नजरअंदाज नहीं कर सकते. यदि ग्राहक किसी विशेष ऑनलाइन डिजाइन की मांग करता है, तो उन्हें उसे पूरा करना ही होगा, ऐसा नहीं करने पर वह प्रतिस्पर्धी बाजार में पिछड़ जाएंगे. यह स्थिति स्थानीय कारीगरों के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रही है, कारीगरों का कहना है कि उनके लिए यह समय बेहद कठिन है. उनके हुनर को अब उतनी पहचान और काम नहीं मिल पा रहा है जितना पहले मिलता था.

वर्जन

आजकल फैंसी ज्वेलरी का प्रचलन है. सोने की कीमत बढ़ने के बाद अब ग्राहक कम वजन में आकर्षक ज्वेलरी खरीद रहे हैं. दिल्ली और मुंबई की कई कंपनियां अब कम वजन में ऐसी ज्वेलरी उपलब्ध करा रही है. दुकानदार भी ग्राहकों की पसंद के अनुसार ज्वेलरी बनाने के लिये कंपनियों को ऑर्डर दे रहे हैं. इसका प्रभाव स्थानीय कारीगरों पर पड़ रहा है. उनके काम में काफी कमी आयी है

– विश्वजीत कुमार, सचिव, सर्राफा संघ

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Author: SANJAY KUMAR

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