Postal Department: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कोई भी भाई अपनी बहन के प्यार और स्नेह से वंचित न रह जाए, इसके लिए मुजफ्फरपुर डाक विभाग ने कर्तव्यनिष्ठा की अनूठी मिसाल पेश की. शुक्रवार को त्यौहार की शाम ढलने के बावजूद जब लोग अपने-अपने घरों में उत्सव मना रहे थे, तब डाक विभाग के डाकिया बहनों द्वारा भेजी गई राखियों को समय पर पहुंचाने के लिए सड़कों पर डटे रहे. डाकियों ने देर शाम तक घर-घर जाकर राखी का वितरण जारी रखा, जिससे भाइयों की कलाई सूनी न रहे.
Raksha Bandhan Postal Delivery: अधूरे पते भी नहीं बन सके रुकावट
राखी पहुंचाने के अपने मिशन में डाककर्मियों ने किसी भी बाधा को आड़े नहीं आने दिया. जिन लिफाफों पर मकान नंबर गायब थे या पता अधूरा लिखा हुआ था, वहां डाकियों ने लिफाफे पर लिखे फोन नंबरों के जरिए लोगों से संपर्क साधा. सही पते की पुष्टि कर डाकियों ने खुद जाकर राखी उनके हाथों में सौंपी. डाकियों की इस तत्परता और लगन के कारण दूर-दराज में बैठी बहनों का प्रेम समय पर उनके भाइयों तक पहुंच पाया.
देर शाम तक खुले रहे डाकघर, कर्मचारियों ने त्यागी छुट्टी
त्यौहार के विशेष माहौल को देखते हुए शहर के प्रधान डाकघर से लेकर विभिन्न उप-डाकघरों तक दिनभर गहमागहमी बनी रही. आमतौर पर शाम को बंद होने वाले काउंटर देर शाम तक खुले रहे. राखी के स्पेशल लिफाफों और पार्सलों की छंटाई व वितरण का काम निरंतर चलता रहा. डाककर्मियों ने अपनी छुट्टी का त्याग करते हुए सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी और अंतिम राखी का वितरण होने तक लगातार काम में जुटे रहे.
डाक अधीक्षक ने खुद संभाली कमान
डाक अधीक्षक आशुतोष आदित्य ने हर राखी को सही समय पर पहुंचाने के लिए खुद मोर्चेबंदी की. वह दिनभर विभिन्न क्षेत्रों के डाकियों से फोन और मैसेज के जरिए संपर्क में रहे और पल-पल का अपडेट लेते रहे. जहां कहीं भी कोई समस्या आई, वहां उन्होंने तुरंत दिशा-निर्देश दिए. उनके इस मार्गदर्शन से डाकियों का मनोबल बढ़ा, जिसकी बदौलत देर शाम तक शत-प्रतिशत राखियों का सफल वितरण सुनिश्चित हो सका.
