वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर जिले में तीन साल पहले नियुक्त किए गए योग प्रशिक्षकों की बहाली को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. हाल ही में पीएचसी प्रभारियों ने इन योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन इसके साथ ही एक ऐसा नया फरमान जारी किया है, जिससे प्रशिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है. नए आदेश के मुताबिक, योग प्रशिक्षकों को तभी भुगतान किया जाएगा जब एक सेशन में कम से कम 25 लोग योग प्रशिक्षण लेने आएंगे. अगर यह संख्या 25 से कम होती है, तो उन्हें भुगतान नहीं मिलेगा. इस नए नियम से परेशान योग प्रशिक्षकों ने अब सिविल सर्जन (सीएस) से गुहार लगाई है. प्रशिक्षकों का कहना है कि औसतन हर सेशन में 10 से 12 लोग ही आते हैं, ऐसे में इस नए नियम से उनका भुगतान रुक जाएगा और वे काम कैसे करेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति की गाइडलाइन में कहीं भी 25 लोगों की संख्या का उल्लेख नहीं है, ऐसे में पीएचसी प्रभारी ने यह अलग से फरमान क्यों जारी किया है. योग प्रशिक्षकों का यह भी कहना है कि इससे पहले भी पीएचसी प्रभारी ने बहाली के लिए उनसे फिर से आवेदन करने को कहा था. जबकि, पिछले महीने सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार ने 128 योग प्रशिक्षकों को बहाल करने के लिए पत्र जारी किया था. उन्होंने सभी पीएचसी प्रभारियों को इन प्रशिक्षकों की बहाली करने का आदेश दिया था. हालांकि, कई पीएचसी प्रभारियों ने फंड की कमी का हवाला देकर इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया था. अब पीएचसी प्रभारी के इस नए निर्देश के बाद योग प्रशिक्षकों ने जिलाधिकारी, सिविल सर्जन और डीपीएम को पत्र लिखकर इस मामले से अवगत कराया है. योग प्रशिक्षक साधना कुमारी ने बताया कि जिले के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर दोबारा बहाली न होने से परेशान होकर तीन योग प्रशिक्षकों – साधना कुमारी, नंदनी कुमारी और अमलेश कुमार ने पटना हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है.
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