Muzaffarpur News: लंगट सिंह महाविद्यालय में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के तत्वावधान में 134वां राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस मनाया गया. डॉ एसआर रंगनाथन की जयंती के अवसर पर आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने पुस्तकालय, पुस्तकों के महत्व और बदलती तकनीक के साथ पुस्तकालय व्यवस्था में हो रहे बदलाव पर चर्चा की.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ कनुप्रिया ने कहा कि डॉ एसआर रंगनाथन केवल पुस्तकालय विज्ञान के जनक ही नहीं, बल्कि ज्ञान के लोकतंत्रीकरण के महान योद्धा थे. उन्होंने कहा कि किताबें खुद चुप रहती हैं, लेकिन उन्हें पढ़ने वाला व्यक्ति बोलना सीख जाता है.
उन्होंने कहा कि आज बच्चों में पुस्तक खरीदने और पढ़ने की आदत कम हुई है. ई-पेपर और डिजिटल माध्यम से पढ़ाई का चलन बढ़ा है, लेकिन पुस्तकों से अध्ययन करने का अनुभव आज भी अलग है.
पुस्तकालय विज्ञान के विकास में रंगनाथन का योगदान
विशिष्ट अतिथि बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष सह पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान संस्थान के डॉ कौशल किशोर चौधरी ने कहा कि डॉ एसआर रंगनाथन को भारत में पुस्तकालय विज्ञान का जनक माना जाता है. वे मूल रूप से गणित के प्रोफेसर थे, लेकिन बाद में पुस्तकालय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया और अपना पूरा जीवन पुस्तकालय विज्ञान के विकास के लिए समर्पित कर दिया.
मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ अभय चौरसिया ने पुस्तकालय प्रबंधन से संबंधित विभिन्न नियमों और व्यवस्थाओं की जानकारी विद्यार्थियों को दी. उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में चीजें व्यवस्थित नहीं हों तो समय बोझिल लगने लगता है. इसलिए समय के साथ बदलाव को स्वीकार करते हुए तकनीक के साथ समन्वय बनाना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी डॉ रंगनाथन की पुस्तकों का बारीकी से अध्ययन कर लें, तो कोई भी तकनीक उनके ज्ञान को प्रतिस्थापित नहीं कर सकती.
कार्यक्रम का संचालन समन्वयक डॉ शशिकांत पाण्डेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रोहित कुमार ने किया. मौके पर कॉलेज के लाइब्रेरियन डॉ मनोज कुमार शर्मा, ऋषि कुमार सहित अन्य मौजूद रहे.
रामदयालु सिंह महाविद्यालय में भी मनाया गया पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस
मुजफ्फरपुर के रामदयालु सिंह महाविद्यालय में भी बीलिस अनुभाग के तत्वावधान में 134वां राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस मनाया गया. बीलिस के समन्वयक डॉ मनोज कुमार सिंह ने डॉ एसआर रंगनाथन के जीवन और योगदान से विद्यार्थियों को अवगत कराया.
बीलिस के संसाधन सेवी डॉ अनिल कुमार ने पुस्तक और पुस्तकालय के महत्व पर प्रकाश डाला. डॉ सौरभ राज ने कहा कि मोबाइल के बढ़ते उपयोग के दौर में भी किताबें पढ़ना जरूरी है.
मुख्य अतिथि वक्ता डॉ कौशल किशोर चौधरी ने कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी और सच्ची मित्र होती हैं. डॉ एसआर रंगनाथन के अनुसार पुस्तकें केवल संग्रह या सजावट की वस्तु नहीं हैं, बल्कि उनका वास्तविक महत्व निरंतर उपयोग और ज्ञान के प्रसार में है.
प्राचार्य प्रो. शशि भूषण कुमार ने कहा कि ज्ञान के बिना सब कुछ अधूरा है. कार्यक्रम में डॉ नीरज कुमार मिश्रा, डॉ दिव्या, डॉ सौरभ राज, डॉ अनुराधा पाठक, डॉ स्नेह लता, डॉ आयशा जमाल, डॉ राजीव कुमार, डॉ जयदीप घोष, डॉ अमर ज्योति रंजन, डॉ आरती कुमारी, डॉ ललित किशोर, डॉ मनीष कुमार शर्मा, भारती कुमारी, उत्पल कुमार, आदित्य कुमार सहित पुस्तकालय विज्ञान के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.
विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान संस्थान में भी आयोजन
डॉ एसआर रंगनाथन की 134वीं जयंती केंद्रीय पुस्तकालय स्थित पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान संस्थान में भी मनायी गयी. संस्थान के निदेशक डॉ कौशल किशोर चौधरी ने कहा कि डॉ रंगनाथन भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक थे. उन्होंने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विकास के लिए आजीवन कार्य किया.
उन्होंने कहा कि डॉ रंगनाथन कई महत्वपूर्ण रचनाएं देकर गए हैं, जिनका लाभ आज पुस्तकालय विज्ञान के विद्यार्थियों और शिक्षकों को मिल रहा है.
कार्यक्रम में सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ गौरी कुमारी, डॉ रोहित कुमार, समीर कुमार, डॉ रौशन यादव, डॉ बसंत भारद्वाज, रागिनी कुमारी, प्रमोद कुमार, अंजनी कुमार सिंह, रौशन मिश्र सहित अन्य मौजूद थे.
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