SKMCH Muzaffarpur: मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच (SKMCH) में डॉक्टरों की संवेदनहीनता और लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है. दो साल के मासूम के नाक में फंसा मोती निकालने के लिए उसकी मां दो दिनों तक अस्पताल में दर-दर भटकती रही. मासूम दर्द से तड़पता रहा और सांस लेने में उसे तकलीफ होती रही, लेकिन डॉक्टरों ने समय पर इलाज शुरू करने की जहमत नहीं उठाई.
खेलने के दौरान नाक में घुस गया था मोती
पीड़ित मासूम अखाड़ाघाट निवासी मो. जावेद का दो वर्षीय पुत्र मो. फैजान है. परिजनों ने बताया कि बुधवार दोपहर खेलने के क्रम में फैजान ने अपनी नाक में मोती डाल लिया. बच्चे के चिल्लाने पर मां पहुंची, तब तक मोती नाक के काफी अंदर जा चुका था. स्थानीय लोगों की सलाह पर परिजन उसे तुरंत एसकेएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड लेकर पहुंचे.
इमरजेंसी से ओपीडी के चक्कर कटवाते रहे डॉक्टर
इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टर ने प्राथमिक जांच के बाद बच्चे को कान, नाक और गला (ENT) विभाग के ओपीडी में ले जाने को कहा. जब मां गुरुवार को ओपीडी पहुंची, तो मौजूद डॉक्टर ने सीनियर के आने की बात कहकर इंतजार करने को कहा. मां अपने मासूम को गोद में लिए सीनियर डॉक्टर का इंतजार करती रही, लेकिन देखते ही देखते ओपीडी का समय खत्म हो गया और कोई इलाज नहीं मिला.
अस्पताल अधीक्षक की सफाई: लेजर से निकाला जाएगा मोती
मामला तूल पकड़ने के बाद एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने बताया कि केस संज्ञान में आते ही ईएनटी विभागाध्यक्ष से बात की गई है. मरीज के परिजनों को सुबह ओपीडी में बुलाया गया था, लेकिन वे देर से पहुंचे. फिर भी बच्चे को शाम में भर्ती कर लिया गया है. लेजर तकनीक के जरिए नाक से विदेशी वस्तु (फारेन बॉडी) निकालने का प्रयास किया जाएगा. अधीक्षक ने सख्त हिदायत दी है कि ऐसे इमरजेंसी मामलों का तत्काल इलाज किया जाए, वरना कड़ी कार्रवाई होगी.
