Muzaffarpur News: शाही लीची के किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. अब ट्रांसपोर्टेशन के दौरान लीची खराब होने का डर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र (NRCL) ने ‘मॉडिफाइड एटमॉस्फियर पैकेजिंग’ तकनीक विकसित की है. इस तकनीक के इस्तेमाल से अब बिना कोल्ड चेन या एसी वैन के भी लीची सामान्य तापमान पर पांच दिनों तक बिल्कुल ताजी रहेगी. हाल ही में मुजफ्फरपुर से सामान्य ट्रक द्वारा दिल्ली भेजी गई लीची की खेप इसका सफल उदाहरण बनी है.
एसी वैन का खर्च बचेगा, बढ़ेगा मुनाफा
पहले सामान्य तापमान में भेजने पर 30 से 40 फीसदी लीची दो दिनों में ही काली पड़ जाती थी. इससे बचने के लिए किसानों को महंगे वातानुकूलित (एसी) वैन का सहारा लेना पड़ता था, जिससे उनका मुनाफा बेहद कम हो जाता था. नई तकनीक के सफल परीक्षण के बाद अब किसान बेहद कम खर्च में देश के सुदूर हिस्सों और विदेशों तक भी अपनी लीची सुरक्षित भेज सकेंगे.
क्या है मॉडिफाइड एटमॉस्फियर पैकेजिंग तकनीक
फल टूटने के बाद भी सांस लेते हैं और ऑक्सीजन के संपर्क में आकर जल्दी काले पड़ जाते हैं. इस तकनीक के तहत लीची को एक विशेष प्लास्टिक बैग में पैक किया जाता है. वैज्ञानिक तरीके से बैग के अंदर ऑक्सीजन को कम करके कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के स्तर को संतुलित किया जाता है. इससे फल के सांस लेने की गति धीमी हो जाती है और लीची ‘स्लीपिंग मोड’ में चली जाती है, जिससे उसका लाल रंग और रसीलापन पांच दिनों तक बरकरार रहता है.
नई तकनीक से बढ़ेगा किसानों का मुनाफा: डॉ. विकास दास
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. विकास दास ने इस बड़ी उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि इस नई पैकेजिंग तकनीक का सफल परीक्षण पूरी तरह से हो चुका है. अब लीची उत्पादक किसानों को देश के दूसरे राज्यों में अपनी फसल भेजने के लिए महंगी एसी गाड़ियों या कोल्ड चेन पर निर्भर रहने की बिल्कुल जरूरत नहीं होगी. इस आधुनिक और किफायती तकनीक के सहारे किसान बेहद कम खर्च में देश-विदेश में कहीं भी अपनी लीची सुरक्षित और ताजी भेज सकेंगे, जिससे अंततः उनका मुनाफा काफी बढ़ जाएगा.
मुजफ्फरपुर से विनय कुमार की रिपोर्ट
