मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: सदर अस्पताल (मॉडल अस्पताल) से संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है,जो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत की पोल खोलती है.ट्रेन हादसे में अपने दोनों पैर गंवा चुके औराई प्रखंड के साहपुर पितोझिया निवासी विनोद साह खटिया लदी जुगाड़ गाड़ी पर लेटकर किसी तरह अस्पताल पहुंचे थे.वे यहां अपना यूडीआईडी (दिव्यांगता) कार्ड बनवाने आए थे,लेकिन अस्पताल के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया.
गेट पर रुका दिव्यांग और मीडिया की पहल से आगे बढ़ी प्रक्रिया
दोनों पैर गंवा चुके विनोद को गेट पर रोके जाने के बाद अस्पताल परिसर में मरीजों और परिजनों की भारी भीड़ जुट गई.उद्घाटन शिलापट्ट के सामने खटिया पर लेटे विनोद को देखकर हर कोई हैरान था.इस बीच मौके पर मौजूद फोटो जर्नलिस्ट दीपक ने मानवीय पहल की.उन्होंने विनोद का पुर्जा और जरूरी कागजात लेकर डॉक्टर के पास पहुंचाए और मरीज की लाचारी से अवगत कराया.इसके बाद डॉक्टर ज्ञानेंदु शेखर ने चैंबर के पीछे की खिड़की से झांककर विनोद का मुआयना किया और कागजी प्रक्रिया पूरी की.
दावों के बीच बेबस दिव्यांग, व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल
विनोद साह ने बताया कि परिवार में कोई ठोस सहारा नहीं है और वह खुद ही जुगाड़ गाड़ी चलाकर यहां तक पहुंचे थे.अस्पताल प्रशासन द्वारा दिव्यांगों के लिए रैंप, व्हीलचेयर और विशेष प्राथमिकता के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं,लेकिन इस घटना ने पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.सवाल यह है कि आखिर ये बुनियादी सुविधाएं विनोद जैसे असली जरूरतमंदों तक समय पर क्यों नहीं पहुंच पाती हैं.
