Muzaffarpur News: इस बार मौसम के मिजाज में उतार-चढ़ाव और कीटों के भीषण प्रकोप ने लीची उत्पादक किसानों को भारी चोट पहुंचाई है. जिले के मीनापुर प्रखंड में जहां 90 फीसदी लीची की फसल खराब हो चुकी है, वहीं कांटी प्रखंड में भी 10 प्रतिशत फसल को नुकसान पहुंचा है. हालांकि, अन्य प्रखंडों के सजग किसानों ने राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र (NRCL) की गाइडलाइन का पालन करते हुए और सही समय पर कीटनाशकों का छिड़काव करके अपनी फसलों को सुरक्षित बचा लिया है.
केंद्रीय कृषि मंत्री को भेजी गई रिपोर्ट
लीची की फसलों को हुए इस भारी नुकसान के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री के निर्देश पर राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. विकास दास के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था. इस सर्वे के बाद नुकसान के सटीक आकलन की एक विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री को भेज दी गई है.
अगले साल के लिए अनुसंधान तेज
निदेशक डॉ. विकास दास ने बताया कि लीची अनुसंधान केंद्र इस समय मौसम के बदलावों और कीटों के हमलों से निपटने के लिए प्रभावी उपायों पर तेजी से रिसर्च कर रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि अगले साल भी ऐसी विपरीत परिस्थितियां बनती हैं, तो वैज्ञानिक तकनीकों के बल पर लीची की फसल को बहुत हद तक बचा लिया जाएगा.
मुजफ्फरपुर से विनय कुमार की रिपोर्ट
