मुजफ्फरपुर से प्रेमांशु शेखर की रिपोर्ट
Muzaffarpur Hospital Fire: शहर के बड़े प्राइवेट अस्पताल प्रसाद में बीते दिनों भीषण अगलगी की वजह से सात मरीजों की झुलसकर और दम घुटने से मौत हो गयी है. हादसे के बाद जिला प्रशासन और और अस्पताल प्रशासन सवालों के घरे में है. जिला प्रशासन की टीम लगातार मामले की जांच कर रही है. छानबीन में खुलासा हुआ है कि हॉस्पिटल के 5वें फ्लोर पर स्थित आईसीयू वार्ड में मरीज को ले जाने के लिए सिर्फ लिफ्ट का इस्तेमाल किया जाता था. वह भी घटना के वक्त बंद था. जबकि आईसीयू में आने-जाने के लिए रैंप का होना जरूरी है. जांच में आईसीयू में आने-जाने के लिए बने सीढ़ी की चौड़ाई कम होने पर भी सवाल खड़े हुए हैं.
ईयरली मेंटेनेंस रिपोर्ट मांगने पर क्या मिला जवाब?
यहीं नहीं, ब्रह्मपुरा थानेदार ने घटना के बाद जब पीआरओ आसिफ इकबाल और बायो मेडिकल इंजीनियर आदित्य विक्रम से भवन संबंधित वार्षिक मेटनेंस रिपोर्ट और प्रिवेंटिव मेटनेंस रिपोर्ट की मांग की तो उत्तर दिया गया कि वह रिपोर्ट संचालक के आने के बाद ही दिया जा सकेगा. अस्पताल के 5वें तल्ले पर बिना रैंप की सुविधा के आईसीयू होने को लेकर एनओसी की मांग की गयी तो वह भी उपलब्ध नहीं कराया गया. इनके पास फायर सेफ्टी को लेकर कितनी बार मॉकड्रिल कराया गया, इसकी भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी. हालांकि, प्रशासन ने फिलहाल आगे की जांच के लिए आईसीयू और सीसीयू को सील कर दिया है.
धुआं फैलने के बाद छोड़ भागे स्टाफ
ब्रह्मपुरा पुलिस का कहना है कि घटना के समय का सीसीटीवी फुटेज की जांच की गयी तो पाया गया कि आईसीयू में आग लगने के बाद धुआं फैलते ही ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मरीजों को उसी स्थिति में छोड़कर बाहर चले गये.
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