मुजफ्फरपुर में महापौर-उपमहापौर और पार्षदों के नेम प्लेट बोर्ड गायब, 45 हजार से अधिक प्रति बोर्ड हुआ था खर्च

मुजफ्फरपुर नगर निगम में लाखों रुपये की लागत से लगाए गए महापौर, उपमहापौर और पार्षदों के नेम प्लेट बोर्ड गायब हो रहे हैं. प्रत्येक बोर्ड पर 45 हजार से अधिक खर्च हुआ था. पार्षदों ने वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है.

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर नगर निगम में महापौर, उपमहापौर और वार्ड पार्षदों की पहचान बताने के लिए लगाए गये नेम प्लेट बोर्ड अब एक-एक कर गायब होने लगे हैं. वर्तमान निगम सरकार के कार्यकाल में जनप्रतिनिधियों के घरों के सामने और वार्डों के प्रमुख स्थानों पर ये बोर्ड लगाए गये थे.

बताया गया कि प्रत्येक बोर्ड पर 45 हजार रुपये से अधिक खर्च हुआ था. लेकिन तीन साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही कई बोर्ड अपने स्थान से गायब हो चुके हैं, जबकि कुछ बोर्ड क्षतिग्रस्त भी हो गये हैं. कम समय में बोर्डों के गायब और क्षतिग्रस्त होने को लेकर नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.

45 हजार से अधिक प्रति बोर्ड हुआ था खर्च

जनप्रतिनिधियों की पहचान के लिए लगाए गये इन नेम प्लेट बोर्ड पर नगर निगम की ओर से प्रति बोर्ड 45 हजार रुपये से अधिक खर्च किये गये थे.

इतनी राशि खर्च होने के बाद भी कई बोर्डों का लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रहना सवाल खड़ा कर रहा है. सार्वजनिक राशि से लगाए गये बोर्डों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

वार्ड नंबर 20 के निवर्तमान पार्षद संजय केजरीवाल ने बोर्ड लगाने में खर्च हुई राशि और उनके गायब होने की स्थिति की जांच कराने की मांग की थी.

निवर्तमान पार्षद ने लगाया वित्तीय गड़बड़ी का आरोप

संजय केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि नेम प्लेट बोर्ड लगाने की पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता हुई है. उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी.

उनके आरोपों के बाद नगर निगम प्रशासन में भी इस मामले को लेकर खलबली मची थी. अब कई बोर्ड के गायब होने और कुछ के क्षतिग्रस्त होने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है.

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.

वार्ड 42 से बोर्ड चोरी होने की शिकायत

वार्ड नंबर 42 की पार्षद अर्चना पंडित ने बताया कि उनके वार्ड से नेम प्लेट बोर्ड चोरी हो गया. उन्होंने इस संबंध में सिटी एसपी से शिकायत भी की थी.

अर्चना पंडित के अनुसार, पुलिस की ओर से उन्हें बताया गया कि गश्ती के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं है. ऐसे में इन बोर्डों की सुरक्षा और निगरानी के लिए अलग से गश्ती कराना संभव नहीं है.

बोर्ड गायब होने के बाद सुरक्षा पर सवाल

नेम प्लेट बोर्ड के गायब होने की घटनाओं के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि सार्वजनिक राशि से लगाए गये इन बोर्डों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी.

साथ ही बोर्ड के गायब होने के बाद नगर निगम स्तर पर क्या कार्रवाई की गयी, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पार्षदों की ओर से मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है.

जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग

नेम प्लेट बोर्ड पर हुए खर्च, उनकी गुणवत्ता, रखरखाव और गायब होने की घटनाओं की जांच की मांग उठ रही है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बोर्ड किस वजह से क्षतिग्रस्त हुए या किन परिस्थितियों में गायब हुए.

अब नजर इस बात पर है कि नगर निगम प्रशासन मामले में क्या कदम उठाता है और सार्वजनिक राशि से लगाए गये इन बोर्डों की स्थिति को लेकर कोई जांच करायी जाती है या नहीं.

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लेखक के बारे में

By देवेश कुमार

पत्रकारिता के क्षेत्र में देवेश को 17 वर्षों का अनुभव है. उच्च शिक्षा, जमीन रजिस्ट्री, नगर निगम की कार्यप्रणाली और स्मार्ट सिटी विकास जैसे विषयों पर इनका विशेष लेखन है. राजनीतिक और सामाजिक समसामयिक मुद्दों के साथ-साथ खोजी पत्रकारिता और ब्रेकिंग न्यूज कवरेज में ये सक्रिय हैं. तथ्यपरक, प्रभावी और जन सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग इनकी प्रमुख पहचान है.

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