Kadane River Pollution: मनियारी इलाके की जीवनदायिनी मानी जाने वाली ऐतिहासिक कदाने नदी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. नदी पर जलकुंभी का इस कदर अंबार लगा है कि दूर-दूर तक पानी की जगह सिर्फ हरी-सूखी परत दिखाई देती है. वर्षों से गाद न निकाले जाने और सफाई न होने के कारण नदी अब मैदान में तब्दील होती दिख रही है. जनप्रतिनिधियों के तमाम वादे धरातल पर हवा-हवाई साबित हुए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है.
किसान, पशुपालक और आम जनता बेहाल
नदी का प्रवाह बाधित होने से स्थानीय जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है.
- खेती-किसानी पर असर: सिंचाई के अभाव और जलजमाव से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं.
- मवेशियों के लिए संकट: पशुपालकों के सामने मवेशियों के पीने के पानी और नहाने-धोने की गंभीर किल्लत खड़ी हो गई है.
- बीमारियों का खतरा: पानी सड़ने से क्षेत्र में बदबू और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे लोगों का जीना मुहाल है.
सावन में श्रद्धालुओं की बढ़ी चिंता
श्रावणी मेले के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु कदाने नदी से पवित्र जल भरकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. लेकिन नदी की दुर्दशा को देखकर यह सवाल उठ रहा है कि इस दूषित पानी में श्रद्धालु जलबोझी कैसे करेंगे.
ग्रामीण दिलीप कुमार ठाकुर सहित स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग से सावन शुरू होने से पूर्व युद्धस्तर पर नदी की सफाई कराने की मांग की है. मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है.
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