Kanti Double Murder: झाड़ियों वाले दलदल से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में आग लगा दी है! महज 6 साल का बेकसूर मासूम आर्यन, जिसका कसूर सिर्फ इतना था कि वह डर के मारे रो रहा था! उस नन्हें से बच्चे की बिलखती आवाज से दरिंदे का गुस्सा इस कदर भड़क उठा कि उसने मासूम को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया और उसकी लाश को झाड़ीदार गड्ढे में फेंक दिया. चार दिन पहले मिली मां मंजू देवी की लाश के बाद जब पुलिस ने मुख्य आरोपी को दबोचा, तो उसने जो उबकाई आने वाला खौफनाक सच उगला, उससे फॉरेंसिक टीम और पुलिसकर्मियों के भी रोंगटे खड़े हो गए!
हैवानियत की इंतहा: मासूम की रोने पर ली जान, विरोध करने पर मां को भी उतारा मौत के घाट
कांटी पुलिस की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी विकास कुमार ने कड़ाई से हुई पूछताछ में उस काली रात का वो खौफनाक मंजर बयां किया, जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप उठे.
दरिंदगी का वो काला सच, जो आरोपी ने खुद कबूला:
- मासूम की हत्या: घटना की रात आरोपी झाड़ियों के पास आराम कर रहे थे. 6 साल का आर्यन डरकर बार-बार रोने और चिल्लाने लगा. चीख-पुकार से बौखलाए आरोपी ने गुस्से में आकर मासूम आर्यन की निर्मम हत्या कर दी और लाश को दलदलनुमा गड्ढे में फेंक दिया.
- मां का खौफनाक अंत: जब मां मंजू देवी ने अपनी आंखों के सामने कलेजे के टुकड़े को मरते देखा और विरोध किया, तो पकड़े जाने के डर से दरिंदों ने उसकी भी सांसे हमेशा के लिए छीन लीं.
- 15 मीटर दूर मिला शव: चार दिन पहले जहां मां की लाश मिली थी, उससे महज 15 मीटर दूर झाड़ियों से मासूम का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ.
भागने की फिराक में था मास्टरमाइंड, पुलिस ने बिछाया जाल और दबोचा
27 जुलाई को नेता चौक के पास मंजू देवी की लाश मिलने के बाद से ही इलाके में सनसनी फैली हुई थी. कांटी थानाध्यक्ष रविकांत पाठक और दारोगा जितेंद्र कुमार चौरसिया की टीम लगातार छापेमारी कर रही थी. 31 जुलाई को हरि पासवान नाम के आरोपी को जेल भेजा गया था.
इसी बीच डीआइयू (DIU) टीम को गुप्त इनपुट मिला कि मुख्य आरोपी विकास कुमार राज्य छोड़कर भागने की फिराक में है. पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. विकास की निशानदेही पर ही मासूम आर्यन का गलता हुआ शव बरामद किया जा सका. परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और वे इस दोहरे हत्याकांड में शामिल हर एक गुनहगार के लिए फांसी की मांग पर अड़े हैं.
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