16वां वित्त आयोग: 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत बिहार के शहरी निकायों में नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को संवारने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है. वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए कुल 9,169 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन को हरी झंडी मिल चुकी है. इस विशाल विकास निधि का सीधा फायदा मुजफ्फरपुर जिले के शहरी निकायों को मिलने जा रहा है.
फंड पाने के लिए कड़ी पात्रता शर्तें तय
अनुदान की पहली किस्त हासिल करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने सख्त मानक तय किए हैं. विभाग के अवर सचिव राशिद इकबाल ने जिले के नगर आयुक्त और कार्यपालक पदाधिकारियों को तय समय सीमा में अनिवार्य प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश जारी किया है. विभाग ने साफ कर दिया है कि शर्तों का अनुपालन होने के बाद ही पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के माध्यम से राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी.
मुजफ्फरपुर के 10 शहरी निकायों को मिलेगा फायदा
इस विकास निधि से जिले के कुल 10 शहरी निकायों का कायाकल्प होगा:
- एक नगर निगम: मुजफ्फरपुर नगर निगम
- तीन नगर परिषद: कांटी, मोतीपुर और साहेबगंज
- छह नगर पंचायत: माधोपुर सुस्ता, मुरौल, सकरा, सरैया, बरूराज और अन्य अधिसूचित क्षेत्र
सिटी फाइनेंस पोर्टल पर इन तीन शर्तों को पूरा करना अनिवार्य
फंड जारी कराने के लिए निकायों को सिटी फाइनेंस पोर्टल पर विस्तृत डेटा अपलोड करना होगा:
- ऑडिट रिपोर्ट: वर्ष 2024-25 का ऑडिटेड वित्तीय विवरण और 2025-26 का प्रोविजनल ब्योरा अपलोड करना जरूरी है.
- 28 सेवा स्तरीय बेंचमार्क: पेयजल, जल निकासी (नाला) और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े 28 सर्विस लेवल बेंचमार्क पोर्टल पर सार्वजनिक करने होंगे.
- उपयोगिता प्रमाण पत्र: पूर्व में प्राप्त अनुदान का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट और चालू योजनाओं की प्रोग्रेस रिपोर्ट सबमिट करनी होगी.
90:10 के अनुपात में आवंटन और खर्च के कड़े नियम
- आवंटन का आधार: राशि का वितरण 90% जनसंख्या और 10% स्व-स्रोत राजस्व (इंटरनल रेवेन्यू) संग्रह के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा.
- 50% टाइड फंड: आधी राशि केवल स्वच्छता, नाला निर्माण, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और जलापूर्ति पर ही खर्च होगी.
- 50% अनटाइड फंड: शेष आधी राशि स्थानीय जरूरतों के लिए होगी, जिसमें से सड़क निर्माण पर अधिकतम 20% ही व्यय किया जा सकता है.
- प्रतिबंध: इस राशि से किसी भी सूरत में कर्मचारियों के वेतन या प्रशासनिक खर्च का भुगतान नहीं किया जा सकेगा.
दस्तावेज समय पर अपलोड न होने पर अनुदान रुक सकता है, जिससे निकायों पर तय समय में रिपोर्ट दर्ज करने का दबाव है.
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