बुजदिलों गर बाजुओं में दम था तो कब्जा छीनते

बुजदिलों गर बाजुओं में दम था तो कब्जा छीनतेशिया समुदाय की ओर से हसन चक बंगरा में मजलिस का आयोजनवरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर . हसन चक बंगरा में रविवार को मजलूमे करबला का मातम मनाया गया. यहां अफसाने हुसैनी में मजलिस भी आयोजित की गयी. जिसकी पेशखानी जुल्फेकार जलालपुरी, इश्तेयाक जलालपुरी, अब्बास यावर ने की. मजलिस […]

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बुजदिलों गर बाजुओं में दम था तो कब्जा छीनतेशिया समुदाय की ओर से हसन चक बंगरा में मजलिस का आयोजनवरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर . हसन चक बंगरा में रविवार को मजलूमे करबला का मातम मनाया गया. यहां अफसाने हुसैनी में मजलिस भी आयोजित की गयी. जिसकी पेशखानी जुल्फेकार जलालपुरी, इश्तेयाक जलालपुरी, अब्बास यावर ने की. मजलिस को खिताब शहदाब हैदर सीतापुरी ने किया. इसके बाद अलम मुबारक निकाला गया. जिसमें अंजुमने अस्बासिया, अंजुमने जाफरिया, अंजुमने मासुमिया, अंजुमने कारवाने केसा ने नोहाखानी की. इस मौके पर उसने मश्किना भरा था तुमसे दरिया छीन कर, बुजदिलों गर बाजुओं में दम था तो कब्जा छीनते, मश्क पर तीरों की बारिश कब था मरदाना जबाब, बात तो तब थी जब तुम मश्के सकीना छीनते जैसे कई शेरों से गम को याद किया. मजलिस बाद हसन चक बंगरा से जुलूस निकाला गया.

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