मुजफ्फरपुर : बिना पढ़ाई किये पांच साल में दो हजार छात्र कर गये इंटर

मृत्युंजय इंटर स्कूलों के वोकेशनल कोर्स में नहीं हैं शिक्षक, जिले के छह स्कूलों में चलता है वोकेशनल कोर्स मुजफ्फरपुर : बिना पढ़ाई, प्रैटिकल और पूरे अटेंडेंस के पिछले पांच सालों में दो हजार वोकेशलन कोर्स के छात्र इंटर की परीक्षा पास कर गये. इस साल भी 500 छात्र बिना पढ़े ही परीक्षा दे रहे […]

मृत्युंजय

इंटर स्कूलों के वोकेशनल कोर्स में नहीं हैं शिक्षक, जिले के छह स्कूलों में चलता है वोकेशनल कोर्स

मुजफ्फरपुर : बिना पढ़ाई, प्रैटिकल और पूरे अटेंडेंस के पिछले पांच सालों में दो हजार वोकेशलन कोर्स के छात्र इंटर की परीक्षा पास कर गये. इस साल भी 500 छात्र बिना पढ़े ही परीक्षा दे रहे हैं. मुजफ्फरपुर के छह इंटर स्कूलों में वोकेशनल कोर्स में शिक्षक नहीं हैं. प्रैक्टिकल भी छात्र बाहर के लैब में करते हैं.

सरकार ने पहले पार्ट टाइम शिक्षकों की नियुक्ति की थी, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया. जिले के जिला स्कूल, मारवाड़ी स्कूल, बीबी काॅलेजियट, चैपमैन बालिका स्कूल, मुखर्जी सेमिनरी और तुर्की हाईस्कूल में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई होती है, लेकिन शिक्षक नहीं हैं. कहीं-कहीं लैब असिस्टेंट से ही वर्षों से काम चल रहा है.

बाहर के लैब में करते हैं प्रैक्टिकल: वोकेशनल कोर्स के छात्र बाहर के लैब में जाकर प्रैक्टिकल करते हैं. जिला स्कूल के प्राचार्य रूपक कुमार ने बताया कि उनके यहां जो छात्र एमएलटी (मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) कोर्स में दाखिला लेते हैं, वे बाहर के पैथ लैब में काम सीखते हैं.

इसके लिए स्कूल में शिक्षक नहीं हैं. दाखिले के वक्त ही छात्रों को बता दिया जाता है कि स्कूल में शिक्षक नहीं हैं, इसलिए क्लास की कोई गुंजाइश नहीं है.

नहीं भर रहीं सीटें, कोर्स भी हुए बंद : वोकेशनल के हर कोर्स में दाखिले के लिए 25 सीटें तय हैं. लेकिन शिक्षकों की कमी से पूरे दाखिले नहीं हो रहे हैं.

किसी-किसी कोर्स में सिर्फ एक दाखिला है, तो किसी में एक भी नहीं. मारवाड़ी स्कूल के प्राचार्य आनंद द्विवेदी ने बताया कि शिक्षकों के नहीं होने से तीन में से एईटी कोर्स में दाखिला उन्होंने बंद कर दिया है. इससे पहले यहां फूड प्रासेसिंग कोर्स में भी दाखिला बंद हो चुका है. मुखर्जी सेमिनरी स्कूल में कोई लैब नहीं है जिससे प्रैक्टिकल हो सके. चैपमैन स्कूल में गारमेंट्स मेकिंग कोर्स में एक भी दाखिला इस बार नहीं हुआ है. पूरे जिले में 18 वोकेशनल कोर्स चलते हैं.

साल में दो से तीन बार आते हैं अटेंडेंस बनवाने : वोकेशनल कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों को स्कूलों में बिना क्लास किये ही अटेंडेंस मिलता है. कुछ शिक्षकों ने बताया कि बच्चे साल में दो से तीन बार आकर अपना अटेंडेंस बनवा लेते हैं. शिक्षक नहीं हैं, इसलिए हम उन्हें अटेंडेंस दे देते हैं. जब दाखिला हो चुका है, तो अटेंडेंस के बिना उनकी परीक्षा न रुके, इसलिए ऐसा किया जाता है.

पास करने पर स्नातक में नहीं होता दाखिला : इंटर वोकेशनल कोर्स पास करने पर कालेज या विवि छात्रों का दाखिला अपने यहां वोकेशनल कोर्स में नहीं लेते.

मुखर्जी सेमिनरी स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि दाखिले के समय काॅलेज कहते हैं कि वोकशनल कोर्स पास करने वाले छात्रों का दाखिला लेने के लिए उनके पास कोई निर्देश नहीं है.

जिला स्कूल : कोर्स- आॅटोमोबाइल- शिक्षक नहीं, मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी- शिक्षक नहीं, आॅफिस मैनेजमेंट-लैब असिस्टेंट

चैपमैन स्कूल : कोर्स- आॅफिस मैनेजमेंट- इंसट्रक्टर, गारमेंट मेकिंग- प्रयोगशाला सहायक, नर्सिंग- प्रयोगशाला सहायक

मारवाड़ी स्कूल : कोर्स- एमएलटी- शिक्षक नहीं, एसीटी- शिक्षक नहीं, फूड प्रासेसिंग – बंद हो चुका

बीबी कालेजियट : कोर्स- कंप्यूटर साइंस- एक इंट्रक्टर, रेडियो एंड टीवी- इंस्ट्रक्टर, लैब असिस्टेंट- एमएचडब्लू- शिक्षक नहीं

मुखर्जी सेमिनरी : एमएसडब्ल्यू- लैब असिस्टेंट, अकाउंटेंसी- लैब असिस्टेंट मुर्गी पालन- लैब असिस्टेंट

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