मुजफ्फरपुर : दिवाली के दूसरे दिन गुरुवार को शहर की हवाओं में दिनभर जहर घुलता रहा. दिवाली पर बुधवार की शाम से जलाये गये पटाखों के धुएं ने वातावरण को काली चादर में लपेट लिया था. देर रात्रि तक धुआं और घना होता गया.
बुधवार को शहर की एयर क्वालिटी का इंडेक्स 388 था, जो गुरुवार को बढ़ कर 391 हो गया. यह दिल्ली की एयर क्वालिटी के करीब है, जहां वायु प्रदूषण सर्वाधिक है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक आठ नवंबर की शाम चार बजे मुजफ्फरपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 388 और दिल्ली का 390 रहा, जो मानक से करीब चार गुना ज्यादा है.
प्रदूषण में सबसे अधिक संख्या सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5) की थी. सात नवंबर को इसका लेवल 280.83 व आठ को 302.99 था. पीएम 2.5 कणों की बढ़ोतरी से माहौल में बारुद जैसी गंध दिन भर मौजूद रही.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एयर क्वालिटी के इस स्तर को बहुत खराब की कैटेगरी में रखा है. ऐसे प्रदूषित माहौल में स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस लेने में परेशानी व फेफड़े में इंफेक्शन का खतरा बताया गया है.
कम छूटे पटाखे, फिर भी बढ़ गया प्रदूषण
दिवाली पर इस बार अन्य वर्षों की अपेक्षा काफी कम पटाखे छूटे. बावजूद प्रदूषण का लेवल बहुत खराब की स्थिति तक पहुंचा. दीवाली के दो दिन पहले से ही जगह-जगह दीयों की सजावट व पटाखे के इस्तेमाल से शहर में प्रदूषण लेवल बढ़ता गया. डॉक्टर बताते हैं कि शहर का बढ़ता प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है.
पहले दीवाली के मौके पर केरोसिन जलने व अधिक पटाखे छूटने से एयर क्वालिटी खराब होती थी, लेकिन इस बार केरोसिन का प्रयोग बहुत कम होने व कम पटाखे छूटने पर भी एयर क्वालिटी बहुत खराब की स्थित में पहुंच गयी है. ऐसे में लोगों को प्रदूषण के प्रति सावधान रहने की जरूरत है.
