रूठा मॉनसून, खरीफ की फसल पर संकट मंडराया

मुजफ्फरपुर : केरल में समय से मॉनसून की दस्तक देने से इस साल बेहतर बारिश की उम्मीद जगी थी. मौसम विभाग ने भी 90 प्रतिशत तक बारिश की संभावना जतायी थी. लेकिन बंगाल की खाड़ी आते-आते मॉनसूनी हवाएं रास्ता भटक गयीं. इस वजह से पिछले तीन साल में मॉनसून के आगमन में सबसे देरी हो […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

मुजफ्फरपुर : केरल में समय से मॉनसून की दस्तक देने से इस साल बेहतर बारिश की उम्मीद जगी थी. मौसम विभाग ने भी 90 प्रतिशत तक बारिश की संभावना जतायी थी. लेकिन बंगाल की खाड़ी आते-आते मॉनसूनी हवाएं रास्ता भटक गयीं. इस वजह से पिछले तीन साल में मॉनसून के आगमन में सबसे देरी हो रही है. मॉनसून के रूठने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जून महीने में सामान्य औसत बारिश 164.1 मिमी है. लेकिन, अब तक सिर्फ 18 मिमी बारिश हुई है. कम बारिश होने से गर्मी भी पूरे तेवर में है. तापमान 40 डिग्री पर पहुंच गया है.

खरीफ फसल की बुआई में हो रही देरी
मॉनसून के आगमन में देरी से खरीफ फसल की बुआई पर असर पड़ रहा है. इससे फसल 10-15 दिन पीछे जा रही है. इसका असर उत्पादन पर पड़ सकता है. बारिश नहीं होने के कारण खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान के लिए नर्सरी तैयार करने में किसानों को परेशानी हो रही है. मक्का के बुआई के लिए भी किसान खेत में नमी आने के इंतजार में हैं. खरीफ फसल में अरहर, मक्का, सोयाबीन के खेती के लिए वेट एंड वॉच की
रूठ गया मॉनसून
स्थिति बनी हुई है. सरैया कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक जीतेंद्र कुमार बताते हैं कि मानसून के आने में अभी और विलंब होता है तो निश्चित रूप से खरीफ फसल प्रभावित होगी. वैसे किसान अपने सिंचाई साधन से बिचड़ा गिरा चुके हैं. मक्के के खेती के लिए नमी आवश्यक है.
जून महीने में सामान्य बारिश 164.1
मिमी, अब तक हुई सिर्फ 18 मिमी
अफगानिस्तान में बने दबाव से मॉनसून हुआ कमजोर
मॉनसून के आने में हो रही देरी का एक बड़ी वजह ईरान व अफगानिस्तान में बना उच्च दबाव है. पहले ही से कमजोर मॉनसूनी हवाओं को ईरान व अफगानिस्तान से से आने वाली तूफानी धूल भरी शुष्क हवा ने आगे जाने से रोक दिया. इसके कारण उत्तर व मध्य भारत में मॉनसून का इंतजार है. मॉनसून आठ जून तक तेजी से बढ़ते हुए पश्चिम बंगाल के बागडोगरा तक पहुंच गया, लेकिन इसके बाद फिर ठिठक गया. मॉनसून पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल में तो मध्य में महाराष्ट्र में ठहरा हुआ है.
ताल तलैया को भी मॉनसून का इंतजार
शहर से लेकर गांव के तालाब सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं. तालाबों में 60 से 70 फीसीदी तक पानी कम हो गया है. ये तालाब अंडरग्राउंड वॉटर को बढ़ाने के लिए काफी जरूरी हैं. तालाबों में और उसके आसपास कई पशुओं व पक्षियों की कई प्रजातियां भी रहती हैं.
ताल तलैया को
इस साल सर्दियों में बारिश नहीं हुई और गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी. बारिश की कमी से तालाबों में पानी कम रहा और इस पर तेज धूप की वजह से पानी सूख गया. कई तलाब तो अब लगभग सूख चुके हैं. इनमें थोड़ा-बहुत पानी है उनमें भी अधिक गंदा ही नजर आ रहे हैं.
फसल पर मंडराया संकट
बेतिया. मैदानी इलाके में मानसून की दस्तक जून के दूसरे सप्ताह तक हो जाती है. लेकिन मौजूदा हालात देख ऐसा नहीं लग रहा कि आनेवाले सप्ताह में बारिश की संभावना है. पिछले दिनों मानसून पूर्व हुई हल्की बारिश से किसानों ने खेती की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन अब मौसम ने दगा दे दिया. विभाग भी मान रहा है कि बारिश शुरू होने में देरी हो रही है. खरीफ की तैयारी किसानों ने शुरू कर दी है. लेकिन, बारिश के अभाव में अभी खेतों में बीज भी नहीं डाले हैं.
उधर, भीषण गर्मी को देखते हुए ग्रीष्मावकाश की छुट्टी के बाद 20 जून को खुलने वाले स्कूल को संचालकों ने पांच दिन के लिए और छुट्टी बढ़ा दी है.
बिचड़ा का समय बीता
मधुबनी : तापमान तीसरे दिन भी 37 डिग्री पर रहा. तेज धूप व उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेचैन कर दिया है. सबसे अधिक परेशानी किसानों को हो रही है. जून माह में अब तक मात्र 72 एमएम बारिश जिले भर में रिकार्ड की गयी है. खेती पर इसका व्यापक असर पड़ रहा है. बिचड़ा गिराने का समय बीतता जा रहा है. किसान आसमान की ओर टकटकी लगाये देख रहे हैं. गुरुवार की सुबह में काले बादल आने के बाद भी एक बूंद भी बारिश नहीं होने से किसान मायूस हैं.
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