एलएस कॉलेज की संपत्ति गिरवी रख लिया 25 लाख लोन

देवेश कुमार मुजफ्फरपुर : एलएस कॉलेज की संपत्ति को गिरवी रख सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 25 लाख रुपये लोन लेने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है. तत्कालीन प्राचार्य डॉ उपेंद्र कुंवर ने बिना विवि की अनुमति के बैंक में एफडी (फिक्स डिपोजिट) कर रखे गये लाखों की राशि को गिरवी रख लोन […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
देवेश कुमार
मुजफ्फरपुर : एलएस कॉलेज की संपत्ति को गिरवी रख सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 25 लाख रुपये लोन लेने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है. तत्कालीन प्राचार्य डॉ उपेंद्र कुंवर ने बिना विवि की अनुमति के बैंक में एफडी (फिक्स डिपोजिट) कर रखे गये लाखों की राशि को गिरवी रख लोन ले लिया.
बताया जाता है कि पूर्व प्राचार्य ने कॉलेज की बाउंड्री बनाने के नाम पर पिछले वर्ष अप्रैल व मई में लोन की निकासी की थी. लगभग दस महीने बाद लोन की ब्याज राशि अधिक होने पर कॉलेज अकाउंट में रखी गयी राशि को बैंक से निकासी में परेशानी हुई, तो इसका खुलासा हुआ. इसके बाद प्रभारी प्राचार्य डॉ अनिल कुमार सिंह ने अपने स्तर से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है. इसमें कई चौंकानेवाले तथ्य सामने आये हैं.
हालांकि, उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले से अवगत कराने से पूर्व सेंट्रल बैंक समेत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अलावा कॉलेज का जिन-जिन बैंक में राशि जमा है, उन सभी बैंकों से कॉलेज अकाउंट व लोन से संबंधित पूरी जानकारी मांगी है. इधर, तत्कालीन प्राचार्य उपेंद्र कुंवर का कहना है कि एफडी कॉलेज की थी, इसलिए कॉलेज ने आवश्यकता महसूस करने पर लोन लिया. लोन एक प्रक्रिया के तहत ली गयी है.
कॉलेज की चल-अचल संपत्ति पर विवि का होता है मालिकाना हक :कॉलेज की चल-अचल संपत्ति पर मालिकाना हक विश्वविद्यालय व स्टैच्यूअरी बॉडी सिंडिकेट का होता है. प्राचार्य को सिर्फ देखरेख करने का अधिकार है.
नियम-परिनियम के जानकार बताते हैं कि किसी भी प्रकार का लोन बिना विवि व सिंडिकेट की अनुमति प्राचार्य नहीं ले सकते हैं. बैंक में एफडी कर रखी गयी राशि अचल संपत्ति में आता है. इसलिए इसे गिरवी रख अधिक ब्याज प्रतिशत पर प्राचार्य
लोन नहीं ले सकते हैं. यह मामलापूरी तरह वित्तीय अनियमितता कीश्रेणी में आता है.
अधिक ब्याज होने पर अकाउंट संचालन में परेशानी से खुला मामला
प्रारंभिक जांच में कॉलेज पर 25 लाख रुपये लोन की बात सामने आयी है. जांच शुरू कर दी गयी है. लोन की राशि बढ़ने की संभावना है. बैंकों से पूरी जानकारी मिलने के बाद हम इसकी रिपोर्ट बना विवि को भेज आगे की कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश मांगेंगे.
डॉ अनिल कुमार सिंह, प्रभारी प्राचार्य, एलएस कॉलेज
प्राचार्य ने मौखिक रूप से मुझे इस मामले से अवगत कराया है. लिखित शिकायत नहीं मिली है. बिना विवि की अनुमति कोई लोन नहीं हो सकता है. प्राचार्य को लिखित तौर पर पूरी रिपोर्ट देने को कहा गया है. इसके बाद मामले पर आगे की प्रक्रिया अपनायी जायेगी.
डॉ अजय कुमार श्रीवास्तव, कुलसचिव, बीआरए बिहार विवि
पांच माह पहले हटाये जा चुके हैं प्राचार्य
तत्कालीन प्राचार्य उपेंद्र कुंवर को सरकार के आदेश पर विवि प्रशासन पांच माह पहले हटा चुका है. उन्हें 21 सितंबर को 62 वर्ष उम्रसीमा पूरा हो जाने पर विवि प्रशासन ने जबरन रिटायरमेंट दे दिया था.
इसके बाद उन्होंने रिटायरमेंट के खिलाफ पटना हाइकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई चल रही है. उनके हटने के बाद अनिल कुमार सिंह को प्रभारी प्राचार्य विवि प्रशासन ने बनाया था.
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