दो शिक्षिकाएं एक ही शिक्षक को बता रहीं पति, विभाग परेशान

मुजफ्फरपुर : दो शिक्षिकाएं ही शिक्षक को अपना पति बता रही हैं. दोनों शिक्षिकाओं के इस दावे से शिक्षा विभाग पेशोपेश में है. यह प्रकरण राज्य सूचना आयोग, शिक्षा विभाग व शिक्षा निदेशालय में घूम रहा है. विभाग का मानना है कि पहली पत्नी के जीवित होने व तलाक नहीं होने की स्थिति में दूसरी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

मुजफ्फरपुर : दो शिक्षिकाएं ही शिक्षक को अपना पति बता रही हैं. दोनों शिक्षिकाओं के इस दावे से शिक्षा विभाग पेशोपेश में है. यह प्रकरण राज्य सूचना आयोग, शिक्षा विभाग व शिक्षा निदेशालय में घूम रहा है. विभाग का मानना है कि पहली पत्नी के जीवित होने व तलाक नहीं होने की स्थिति में दूसरी शादी का प्रावधान नहीं है.

वहीं, पति से तलाक नहीं होने पर दूसरा पति अवैध है. ऐसे में कानूनी सलाह व विभाग का मार्गदर्शन जरूरी है. जो विधि सम्मत कार्रवाई संभव होगी, की जायेगी. लाल बाबू सिंह शिक्षक हैं. इनका पदस्थापन कुढ़नी प्रखंड के हाइस्कूल मनियारी में था. एक शिक्षिका तान्या सिन्हा हैं, जो गोबरसही में रहती हैं. दूसरी शिक्षिका चित्रगुप्तपुरी निवासी गौरी सिन्हा हैं. दोनों लाल बाबू सिंह को अपना पति बता रही हैं. पहली पत्नी होने का दावा करनेवाली तान्या सिंह ने डीपीओ स्थापना कार्यालय में सुनवाई के दौरान उपस्थित होकर कई साक्ष्य भी उपलब्ध कराये. लेकिन, गौरी सिन्हा सेवापुस्तिका में पति के नाम पर हुई विभागीय कार्रवाई की जानकारी आरटीआइ से मांग रही थी. हालांकि, इससे विवाद नहीं सुलझा और उलझ गया.

विवाद सुलझाने के लिए डीपीओ स्थापना ने 4 सितंबर, 2015 को दोनों पक्षों को उपस्थित होने का आदेश दिया था. सुनवाई में तान्या सिन्हा उपस्थित हुई. लेकिन, गौरी सिन्हा उपस्थित नहीं हुई. डीपीओ स्थापना ने 17 सितंबर, 2015 को गौरी सिन्हा से स्पष्टीकरण मांगा. फिर अगली सुनवाई 1 सितंबर, 2017 को कहा, आपकी प्रथम नियुक्ति गोरौल के मवि आदमपुर में हुआ. पदस्थापना के समय पति का नाम राज नारायण पांडेय था, जो आदमपुर के ही रहनेवाले हैं. इसके बाद वर्ष 1983 में उवि मनियारी में पदस्थापित शिक्षक लाल बाबू सिंह के साथ शिक्षक के विरुद्ध आचरण अपनाते हुए फरार हो गयीं. हाजीपुर कोर्ट में मामला दर्ज है. इसके बाद श्री सिंह के गोबरसही स्थित आवास में असंवैधानिक रूप से रहने लगी.

फर्जी तरीके से सेवा पुस्तिका में बदल लिया पति : पति का नाम फर्जी तरीके से लाल बाबू सिंह अंकित कर दिया. अपने नाम से अर्जित संपत्ति व जमीन दस्तावेज में भी पति का नाम लाल बाबू सिंह बता दिया, जैसा कि दस्तावेज से स्पष्ट है. दोनों शिक्षिकाओं का विवाद फिलहाल बढ़ता जा रहा है.

राज्य सूचना आयोग पूरे मामले पर नजर बनाये हुए है. एक सितंबर को डीपीओ स्थापना ने राज्य सूचना आयोग में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा था, लेकिन अभी तक निष्कर्ष नहीं निकला है.

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