– जिम्मेदारों की लापरवाही ने बढ़ायी टेंशन, जाम से कराह रहा राष्ट्रीय राजमार्ग 80 एवं 333बी
मुंगेरजब से भागलपुर का विक्रमशीला पुल टूटा है, तब से मुंगेर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है. जिसक कारण एनएच-80 से लेकर एनएच-333बी पर जाम की समस्या आम हो गयी. लगभग हर दिन जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है और सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं. सोमवार को भी भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों जाम में फंसने से यात्रियों, वाहन चालकों और स्थानीय राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
रेंग रही थी वाहन, भीषण गर्मी में यात्री परेशान
जानकारी के अनुसार, तेलिया तालाब से लेकर श्रीकृष्ण सेतु एप्रोच पथ तक वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन, बसें, ट्रक और निजी गाड़ियां गुजरती हैं. वहीं निर्माणाधीन ओवरब्रिज, कई स्थानों पर संकरी सड़क और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यातायात व्यवस्था बार-बार प्रभावित हो रही है. रविवार देर रात जाम की स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब एक ट्रक तैलिया तालाब के आस-पास सड़क किनारे बने गड्ढे में फंस गया. ट्रक के फंसते ही सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और दोनों ओर यातायात की रफ्तार थम गई. देखते ही देखते कई किलोमीटर तक वाहनों की लाइन लग गई. जिसका असर सोमवार को भी दिन भर एनएच पर देखेने को मिली. हालात यह था कि वाहन चल नहीं, बल्कि रेंग रही थी. इस जाम में फंसे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में घंटों की देरी का सामना करना पड़ा. सबसे अधिक परेशानी गर्मी और उमस के कारण हुई. वाहन चालकों और यात्रियों को लंबे समय तक सड़क पर इंतजार करना पड़ा. कई लोग अपने वाहनों से उतरकर जाम खुलने का इंतजार करते नजर आए. कुछ यात्रियों ने बताया कि जाम के दौरान पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव रहा, जिससे परेशानी और बढ़ गई.
जिम्मेदारों के कारण बढ़ रहा समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि एनएच-80 पर पिछले कुछ महीनों से यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके अनुरूप ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकी है. लोगों का मानना है कि निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था और संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती से जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. लेकिन जिम्मेदार पूरी तरह से अंजान बने हुए है. जबकि अब इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और यातायात व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके.
