इतिहास के पन्ने में दफन हो गया जमालपुर में एटीपी स्कूल, इंस्टीट्यूट व महिला समिति भवन

इंस्टिट्यूट व एटीपी स्कूल भवन को तो पहले ही किया गया था डिमोलिश, महिला समिति भवन को गुरुवार को किया डिमोलिश

जमालपुर. रेल नगरी जमालपुर के रामपुर कॉलोनी परिसर में स्थित महिला समिति इंस्टिट्यूट और एटीपी स्कूल के भवन को डिमोलिश कर दिया गया. इसके बाद जमालपुर की तीनों धरोहर इतिहास के पन्नों में दफन होकर रह गयी. इनमें से इंस्टिट्यूट और एटीपी स्कूल भवन को तो पहले ही डिमोलिश किया गया था, परंतु महिला समिति भवन को गुरुवार को डिमोलिश किया गया.

अंग्रेजों के समय तीनों प्रतिष्ठानों के भवनों का किया गया था निर्माण

जानकार बताते हैं कि रेल इंजन कारखाना जमालपुर की स्थापना 1862 में की गयी थी. इसके बाद यहां के मजदूरों के लिए रेलवे क्वार्टर का भी निर्माण किया गया था. रामपुर रेलवे कॉलोनी भी उन्हीं रेल कॉलोनी में से एक है. जहां रेल कर्मियों के मनोरंजन के लिए इंस्टीट्यूट बनाया गया, जबकि रेल कर्मियों की पत्नी और बालिकाओं के लिए महिला समिति भवन का निर्माण किया गया. यहां महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी. वहीं रामपुर रेलवे कॉलोनी में एटीपी स्कूल की व्यवस्था भी की गयी. जहां इस कॉलोनी में रहने वाले रेल कर्मियों के बच्चे की पढ़ाई की व्यवस्था की गयी थी. कालांतर में रेलवे ने कई प्रकार के परिवर्तन किये. जमालपुर के रेलवे मध्य विद्यालय नंबर वन और नंबर 2 के साथ ही मिक्स्ड प्राइमरी स्कूल को बंद कर दिया गया. इसी कालखंड में रामपुर कॉलोनी के एटीपी स्कूल को भी बंद कर दिया गया. इसके बाद से यह भवन अनुपयोगी बनकर रह गया था. ऐसा ही हाल इंस्टिट्यूट का भी हुआ. रेलवे के सिनेमा हॉल या नेशनल इंस्टीट्यूट को बंद करने के बाद रामपुर कॉलोनी इंस्टिट्यूट को भी बंद कर दिया गया और महिला समिति भवन को भी अनुपयोगी मानते हुए डिमोलिश कर दिया गया. वैसे स्थानीय लोगों की मानें, तो यदि ईस्ट कॉलोनी की महिला समिति में विद्यालय का संचालन किया जा सकता है तो रामपुर कॉलोनी की महिला समिति में भी इस कॉलोनी में रहने वाले रेल कर्मियों के बच्चे के लिए स्कूल का संचालन किया जाना चाहिए था.

असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गये थे खाली भवन

रामपुर रेलवे कॉलोनी में रहने वाले रेलकर्मियों ने बताया कि वास्तव में इंस्टिट्यूट भवन महिला समिति भवन और एटीपी स्कूल भवन जिस उद्देश्य से बनाया गया था, उस उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो रही थी. ये तीनों भवन अनुपयोगी हो गये थे. ऐसे में यहां असामाजिक तत्वों ने डेरा डाल रखा था. इसके कारण इसके आसपास रहने वाले रेलकर्मी और उनके परिजन काफी परेशान थे. इसकी शिकायत भी मुख्य कारखाना प्रबंधक विनय प्रसाद वर्णवाल से रेलकर्मियों ने की थी. इसके बाद मुख्य कारखाना प्रबंधक ने तीनों भवनों का निरीक्षण भी किया था. तीनों भवन को अनुपयोगी मानते हुए उन्हें डिमोलिश करने का आदेश भी दिया गया था. इसके परिप्रेक्ष्य में इन तीनों भवन को डिमोलिश कर दिया गया.

कहते हैं अधिकारी

आईओडब्ल्यू दिनेश मंडल ने बताया कि मुख्य कारखाना प्रबंधक द्वारा निरीक्षण के उपरांत इन भवन को डिमोलिश करने का आदेश दिया गया था. इसके कारण भवनों को ध्वस्त कर दिया गया.

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Author: RANA GAURI SHAN

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