भगत सिंह शहादत स्मरणांजलि 2025 कार्यक्रम में वक्ताओं ने रखे अपने विचार
जेआरएस कॉलेज जमालपुर के प्रशाल में बुधवार को भगत सिंह शहादत स्मरणांजलि 2025 कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
मुंगेर. जेआरएस कॉलेज जमालपुर के प्रशाल में बुधवार को भगत सिंह शहादत स्मरणांजलि 2025 कार्यक्रम का आयोजन किया गया. अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य सह सामाजिक विज्ञान संकायध्यक्ष प्रो. देवराज सुमन तथा संयोजन डीएसडब्ल्यू प्रो. भवेशचंद्र पांडेय ने किया. मुख्य वक्ता प्रो. चमन लाल थे. वहीं विशिष्ट अतिथि निरंजन महापात्र तथा विशिष्ट वक्ता प्रो. हितेंद्र पटेल थे. कार्यक्रम का संचालन प्रो. श्याम कुमार ने किया. प्रथम सत्र के विचार गोष्ठी का प्रारंभ अतिथियों के सम्मान के साथ किया गया. जिसके बाद डीएसडब्ल्यू ने कहा कि भगत सिंह पूरे भारतीय विरासत के अगुआ हैं. ऐसे व्यक्तित्व को सादर याद करते हुए हम अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं. विशिष्ट अतिथि ने जलियांवाला बाग के हत्याकांड एवं ऐसी ही तमाम घटनाओं को उन्होंने प्रेरक बताते हुए भगत सिंह के जीवन को आकार लेते बताया. उन्होंने एसेंबली के खाली बेचों पर इसलिए बम फेंका, क्योंकि उन्होंने अदालत की चौखट को मंच की तरह इस्तेमाल करने के इरादे से उन्होंने अपने जीवन का उपयोग किया. भगत सिंह को जब हम याद करते हैं तो यह कहना होगा कि वे लंबी जिंदगी से ज्यादा बड़ी जिंदगी को अहमियत दे सकते हैं. जयंत चौधरी ने कहा कि भगत सिंह को आज इसलिए याद किया जाना चाहिए, क्योंकि वे सांप्रदायिकता के घोर विरोधी थे. उन्होंने गुलाम भारत में जो कुछ कहा वह आज वैसे लोगों के लिए करारा जवाब है, जो सांप्रदायिक राजनीति कर देश में तनाव फैलाते हैं. मुख्य अतिथि ने कहा कि भगत सिंह ने कहा है कि मेरा जीवन हिंदुस्तान की आजादी और समाज परिवर्तन के लिए समर्पित है और यह समर्पण बलिदान तक की अंतिम इच्छा से पूरी है. भगत सिंह कहते थे कि हम केवल भारत की आजादी के लिए नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए लड़ रहे हैं. विशिष्ट वक्ता ने कहा कि भगत सिंह केवल पंजाब में नहीं पैदा हुए, बल्कि वे भारतीय चिंताओं को सोचते हुए पूरे देश के विरासत के अगुआ बन जाते हैं. रिवॉल्यूशनरी ट्रेडिशन की परंपरा को इस देश ने नहीं भुलाया है, यह भगत सिंह और उनके साथियों के जीवन की बलिदानी आकांक्षा का प्रतिरूप है. कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि भगत सिंह के शहादत पर यह कार्यक्रम क्रांतिकारियों के बलिदान के उस ऋण के प्रति कृतज्ञता के रूप अर्पित करने से जुड़ा है. आज भगत सिंह नहीं हैं मगर उनके विचारों की शान पर यह देश जिस तरह अंगड़ाई ले रहा है. मौके पर डॉ मुनींद्र कुमार सिंह, ज्योति कुमार, दिनेश कुमार, डॉ चन्दन कुमार, डॉ अजय प्रकाश, डॉ अभय कुमार, डॉ शाहिद रजा जमाल, डॉ राजेश कुमार सिंह, डॉ संजय मांझी, डॉ वंदना कुमारी, प्रो श्याम कुमार, डॉ ओम प्रकाश, डॉ अंशु राय, डॉ शोभा राज, डॉ रामरेखा कुमार, डॉ रोहित कुमार आदि मौजूद थे.
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